आखिर दोनों ने मिलकर मेरा सारा माल पी लिया और कहा…
सामने वाले घर की प्रिया और सोनम… एक अनुभवी, एक कुंवारी जैसी शर्मीली। पहले तो दोनों दूर भागती रहीं, लेकिन मेरी जिद और उनकी चुपके-चुपके नजरों ने सब बदल दिया। अंधेरे कमरे में दोनों नंगी हो गईं। बड़ी ने अपने मोटे दूध मेरे मुँह में ठूंस दिए, छोटी ने अपनी गीली चूत मेरे चेहरे पर रगड़ी। फिर मैंने दोनों को घोड़ी बनाकर एक-एक करके चोदा। बहनें एक-दूसरे की आँखों में देखती रहीं जबकि मेरा मोटा लंड उनकी चूत फाड़ रहा था। आखिर दोनों ने मिलकर मेरा सारा माल पी लिया और कहा… अब रोज आना।
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Raj
8/2/2026
मैं राज हूँ, पच्चीस साल का। अहमदाबाद के एक पुराने कॉलोनी में किराए के एक छोटे से दो कमरे के फ्लैट में रहता हूँ। फ्लैट की बालकनी से ठीक सामने वाला छोटा सा मकान साफ दिखता है। वहाँ दो बहनें रहती हैं। बड़ी वाली प्रिया, सत्ताईस साल की, और छोटी वाली सोनम, बाईस की। उनके माता-पिता ज्यादातर गाँव चले जाते रहते हैं। घर में अक्सर सिर्फ दोनों बहनें ही होती हैं।
पहली बार जब मैंने प्रिया को देखा तो वो छत पर कपड़े सुखा रही थी। सफेद सलवार कमीज में, बाल खुले हुए, चेहरा पसीने से चमक रहा था। बड़े-बड़े दूध सलवार के ऊपर से साफ उभर रहे थे। निप्पल तक के निशान साफ दिख रहे थे। सोनम नीचे आँगन में पानी भर रही थी। छोटी कद की, गोल-मटोल शरीर, टाइट जींस और हल्की टी-शर्ट में। दोनों को देखकर मेरे लंड ने पहली बार जोर से तनना शुरू किया था।
मैं रोजाना बालकनी में खड़े होकर उन्हें देखता था। प्रिया सुबह योग करती थी। उसकी कमर मुड़ते हुए दूध आगे-पीछे हिलते थे। सोनम कॉलेज जाती थी। एक दिन प्रिया की नजर मुझ पर पड़ी। उसने हल्के से मुस्कुरा दिया। मैंने भी मुस्कुरा दिया। बस इतना। उस रात मैंने मुठ मारी। प्रिया के दूध और सोनम की गोल गांड दोनों को याद करके।
तीन दिन बाद मैंने जानबूझकर अपनी साइकिल का टायर पंक्चर करवाया और उनके घर के बाहर खड़ा होकर टायर देख रहा था। प्रिया बाहर आई।
“क्या हुआ?” उसने पूछा।
“टायर पंक्चर हो गया। कोई दुकान पास में है क्या?”
“थोड़ा आगे मार्केट में है। मैं बता दूँ?”
उसने मुझे रास्ता बताया। बात सिर्फ दो मिनट की थी। लेकिन जब वो अंदर गई तो मेरे लंड ने जोर से धक्का मारा। रात को फिर मुठ मारी। इस बार और जोर से।
अगले हफ्ते मैंने अपनी बिजली कटवा दी। रात के नौ बजे उनके घर का दरवाजा खटखटाया।
“प्रिया जी… बिजली चली गई है। अगर कोई मोमबत्ती या लाइट हो तो…”
प्रिया दरवाजे पर आई। सोनम पीछे खड़ी थी। दोनों ने मुझे अंदर बुलाया। घर में सिर्फ एक लालटेन जल रही थी। मैं बैठ गया। प्रिया ने पानी दिया। सोनम किचन में चली गई।
“आप अकेले रहते हो?” प्रिया ने पूछा।
“हाँ।”
“हमारे माता-पिता गाँव गए हैं। दो हफ्ते बाद आएंगे।”
बातचीत सामान्य रही। लेकिन जब मैं लौटने लगा तो प्रिया ने कहा, “अगर फिर कोई जरूरत हो तो बता देना।”
रात को फिर मुठ। इस बार मैंने सोचा कि दोनों को कैसे करीब लाऊँ।
अगले दिनों मैंने छोटी-छोटी मदद शुरू की। एक दिन सोनम की साइकिल की चेन निकल गई। मैंने ठीक की। सोनम ने धन्यवाद कहा लेकिन जल्दी से अंदर चली गई। मैंने देखा कि उसकी नजर मेरे लंड पर चली गई थी जब मैं झुककर चेन ठीक कर रहा था।
दो दिन बाद प्रिया ने खुद मुझे बुलाया। उनके टीवी का रिमोट खराब हो गया था। मैंने बैटरी बदली। बातें होने लगीं। प्रिया ने बताया कि वो नौकरी ढूँढ रही है। सोनम कॉलेज फाइनल ईयर में है।
मैं रोज थोड़ी देर बैठने लगा। कभी चाय, कभी पानी। प्रिया मुझसे खुलकर बात करने लगी। सोनम ज्यादातर चुप रहती। लेकिन कभी-कभी उसकी नजर मेरे लंड पर चली जाती जब मैं खड़ा होता।
एक शाम मैंने जानबूझकर देर तक बैठा रहा। सोनम कॉलेज से लौटी। उसने मुझे देखा और मुस्कुराई।
“भैया रोज आ जाते हो अब?”
मैंने हँसा। “तुम्हारी बहन की मदद कर रहा हूँ।”
प्रिया किचन में थी। सोनम मेरे पास बैठ गई। बातों-बातों में उसने अपना फोन गिरा दिया। दोनों झुके। मेरे हाथ का स्पर्श उसके हाथ से हुआ। सोनम का हाथ काँप गया। उसने जल्दी से फोन उठाया और कमरे में चली गई।
उस रात मैंने दोनों को याद करके दो बार मुठ मारी। पहली बार प्रिया के बड़े दूध को चूसते हुए सोचा, दूसरी बार सोनम की टाइट चूत में लंड घुसाते हुए।
अगले दिन प्रिया अकेली थी। मैं गया। बातें गहरी हो गईं। उसने बताया कि उसके पिछले रिलेशनशिप में धोखा हुआ था। मैंने सुना। सहानुभूति दिखाई।
“तुम अच्छे लगते हो राज,” उसने अचानक कहा।
मैंने उसकी आँखों में देखा। वो नजरें चुरा गई।
मैंने हाथ बढ़ाया। उसके हाथ को छुआ। उसने हाथ नहीं हटाया। लेकिन जब मैं करीब गया तो उसने कहा,
“नहीं… ये ठीक नहीं। सोनम घर में है।”
मैं रुक गया। प्रिया उठकर किचन में चली गई। मैं लौट आया। दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। लंड पूरी तरह तना हुआ था।
दो दिन बाद सोनम अकेली थी। प्रिया मार्केट गई थी। मैं गया। सोनम ने दरवाजा खोला।
“दीदी नहीं है।”
“मैं जानता हूँ। तुमसे बात करनी थी।”
मैं अंदर बैठा। सोनम किचन से पानी लाई। मैंने उसके बारे में पूछा। कॉलेज, दोस्त, भविष्य। वो खुलने लगी। एक घंटे तक बातें हुईं। जब मैं उठने लगा तो सोनम ने कहा,
“आप… आप दीदी को पसंद करते हो ना?”
मैंने हँसा। “तुम्हें क्या लगता है?”
सोनम की गर्दन लाल हो गई। उसने नजरें झुका लीं।
मैंने उसकी ठोड़ी उठाई। “तुम भी बहुत सुंदर हो सोनम।”
उसके होंठ काँपे। मैंने धीरे से चूम लिया। सिर्फ एक हल्का सा चुंबन। सोनम झटके से पीछे हटी।
“नहीं… ये गलत है। दीदी…”
वो कमरे में भाग गई। मैं बाहर आ गया। शरीर में गर्मी दौड़ रही थी।
अगले तीन दिन दोनों ने मुझसे दूरी बनाई। प्रिया ने कहा कि वो बिजी है। सोनम ने नजरें मिलानी बंद कर दी। मैंने सोचा अब सब खत्म। लेकिन मन में दोनों की तस्वीरें घूमती रहीं।
एक रात बारिश हो रही थी। बिजली चली गई। मैंने लालटेन लेकर उनके घर का दरवाजा खटखटाया।
प्रिया ने खोला। अंदर अंधेरा था। सोनम सोफे पर बैठी थी।
“आ जाओ… बारिश में भीग जाओगे।”
मैं अंदर बैठा। तीनों अंधेरे में बात करने लगे। बातें गहरी होती गईं। प्रिया ने बताया कि वो अकेलीपन महसूस करती है। सोनम ने कहा कि वो भी।
मैंने प्रिया का हाथ पकड़ लिया। उसने हाथ नहीं छुड़ाया। सोनम देख रही थी।
“प्रिया… मुझे तुम दोनों पसंद हो।”
प्रिया की साँस तेज हो गई। सोनम की आँखें फैल गईं।
प्रिया ने धीरे से कहा, “सोनम के सामने ये बात मत करो।”
लेकिन सोनम ने खुद कहा,
“मैं… मैं भी सुनना चाहती हूँ।”
उस रात कुछ और नहीं हुआ। लेकिन तनाव चरम पर था। दोनों की साँसें तेज चल रही थीं। मैंने देखा कि प्रिया के निप्पल सलवार से उभर आए थे। सोनम की जाँघें भींच रही थी।
अगले दिन प्रिया ने मुझे अकेले बुलाया। घर में सोनम नहीं थी।
“राज… ये सब गलत है। हम बहनें हैं। तुम हमारे पड़ोसी हो।”
मैंने उसका हाथ पकड़ा। “मैं जानता हूँ। लेकिन मैं खुद को रोक नहीं पा रहा।”
प्रिया की आँखों में पानी आ गया। “मैं भी… लेकिन डर लगता है।”
मैंने उसे गले लगा लिया। प्रिया ने विरोध नहीं किया। मैंने उसके होंठ चूम लिए। गहरा चुंबन। जीभ अंदर। प्रिया की साँसें तेज हो गईं। उसके बड़े दूध मेरे सीने से दब रहे थे। मैंने हाथ बढ़ाकर एक दूध दबाया। प्रिया की आह निकल गई।
“उम्म… राज… रुको…”
लेकिन वो रुकी नहीं। चुंबन गहरा होता गया। मेरे हाथ उसके दोनों दूध पर चले गए। मैंने निप्पल को उँगलियों से घुमाया। प्रिया की कमर काँपने लगी।
तभी दरवाजे पर सोनम की आवाज आई। “दीदी… मैं आ गई।”
हम दोनों झटके से अलग हो गए। प्रिया किचन में भाग गई। मैं बैठा रहा। सोनम अंदर आई। उसने दोनों के चेहरे देखे। कुछ समझ गई।
“क्या हुआ?”
प्रिया ने जवाब नहीं दिया। मैंने कहा, “कुछ नहीं।”
सोनम चुपचाप अपने कमरे में चली गई। उस रात मैंने सोचा कि अब दोनों जान गई हैं। डर भी लगा और मजा भी।
अगले दिन माता-पिता का फोन आया। वो और तीन दिन रुकने वाले थे। घर खाली था।
शाम को मैं गया। दोनों तैयार बैठी थीं। कमरे में सिर्फ एक दीया जल रहा था। प्रिया ने दरवाजा बंद कर दिया।
“आज… आज हम…”
मैंने दोनों को गले लगा लिया। पहले प्रिया को चूमा। गहरा, गीला चुंबन। जीभ से जीभ लड़ी। प्रिया की लार मेरे मुँह में आ गई। फिर सोनम की तरफ मुड़ा। सोनम काँप रही थी। मैंने उसके होंठ चूमे। पहले हल्के, फिर जोर से। सोनम की जीभ धीरे-धीरे मेरे मुँह में आई। दोनों बहनें मेरे दोनों तरफ थीं। मैं एक को चूमता तो दूसरी का दूध दबाता।
मैंने प्रिया के कपड़े उतारने शुरू किए। कमीज के बटन एक-एक करके खोले। उसके बड़े-बड़े दूध बाहर आ गए। गोरे, मुलायम, गुलाबी निप्पल तने हुए। मैंने एक निप्पल मुँह में ले लिया। चूसा। जीभ से घुमाया। काटा। प्रिया की गर्दन पीछे झुक गई।
“आआआह्ह्ह… राज… धीरे…”
सोनम देख रही थी। उसकी साँसें तेज चल रही थीं। मैंने सोनम की टी-शर्ट ऊपर की। उसके छोटे लेकिन गोल और कसे हुए दूध निकले। निप्पल गुलाबी और सख्त। मैंने दोनों बहनों के दूध एक साथ दबाए। दोनों की सिसकारियाँ एक साथ गूँजीं।
मैंने प्रिया को बिस्तर पर लिटा दिया। उसकी सलवार नीचे की। पैंटी पूरी तरह गीली थी। बीच में गहरा निशान बना हुआ था। मैंने पैंटी सरकाई। उसकी चूत के बाल साफ कटे हुए थे। गुलाबी होंठ सूजे हुए, पानी से चमक रहे थे। चूत की दरार से हल्का सा पानी रिस रहा था।
मैंने नाक चूत के पास लगाई। तीखी, मदभरी खुशबू। मैंने जीभ निकाली और एक लंबी चाट की। नीचे से ऊपर तक। प्रिया की कमर उछल गई।
“आह्ह्ह… क्या कर रहे हो… मत चाटो…”
मैंने चूत के होंठ फैलाए। बीच की गांठ को चूसा। जीभ अंदर घुसाई। अंदर की दीवारें गरम और गीली थीं। प्रिया की उँगलियाँ मेरे बालों में घुस गईं। मैंने जीभ और तेज चलाई। छप-छप की आवाज आने लगी।
सोनम खड़ी देख रही थी। उसकी एक हाथ अपनी चूत पर था। मैंने उसका हाथ पकड़कर अपनी तरफ खींचा।
“तुम भी उतरो।”
सोनम ने धीरे-धीरे कपड़े उतारे। उसकी चूत पर हल्के बाल थे। गुलाबी और छोटी सी। मैंने एक हाथ से प्रिया की चूत चाटी और दूसरे हाथ से सोनम की चूत में उँगली डाली। सोनम की चूत बहुत टाइट थी। उँगली मुश्किल से अंदर गई।
“आआ… दीदी… ये… दर्द हो रहा है…”
प्रिया की आँखें सोनम पर थीं। “आह्ह… राज… सोनम को भी… उउउह्ह्ह… और अंदर…”
मैंने दोनों की चूत बारी-बारी चातने शुरू किए। प्रिया की चूत का पानी ज्यादा था, मीठा और गाढ़ा। सोनम की टाइट और हल्की खट्टी। मैंने दोनों का पानी चाटा। स्वाद अलग-अलग था। दोनों की जाँघें काँप रही थीं।
फिर मैंने अपना लंड निकाला। नौ इंच का मोटा, नसों वाला लंड। सिरे से प्रीकम टपक रहा था। दोनों बहनों की आँखें फैल गईं।
“इतना… मोटा…” सोनम ने फुसफुसाया।
मैंने प्रिया को संकेत किया। प्रिया घुटनों के बल बैठी और लंड मुँह में ले लिया। धीरे-धीरे। मैंने उसके बाल पकड़कर गले तक ठोका। प्रिया की आँखों से आँसू आ गए लेकिन उसने लंड नहीं छोड़ा। ग्लप-ग्लप की आवाज आने लगी।
सोनम देख रही थी। मैंने उसका सिर पकड़कर अपनी तरफ खींचा।
“तुम भी चूसो।”
दोनों बहनें एक साथ मेरे लंड पर लग गईं। एक चूस रही थी, दूसरी तले और अंडकोष चाट रही थी। लार टपक-टपक कर मेरे लंड पर गिर रही थी। मैंने दोनों के सिर दबाए। लंड एक के मुँह से निकलकर दूसरे के मुँह में जाता। दोनों की जीभें लंड पर मिल रही थीं।
“आह्ह… दोनों… क्या मस्त चूस रही हो… और गहरा…”
फिर मैंने प्रिया को बिस्तर पर लिटाया। टाँगें फैलाईं। लंड चूत के मुँह पर लगाया। प्रीकम से चमक रहा था।
“धीरे… राज… बहुत दिन हो गए…”
मैंने धीरे-धीरे धक्का मारा। आधा लंड अंदर गया। प्रिया की चूत ने जकड़ लिया। दीवारें गरम और तंग थीं।
“आआआह्ह्ह्ह… अंदर… पूरा… और अंदर…”
मैंने पूरा लंड घुसा दिया। प्रिया की आँखें बंद हो गईं। मुँह खुला रह गया। मैंने धक्के शुरू किए। धीरे-धीरे, फिर तेज। छप-छप की गीली आवाज घर में गूँजने लगी। हर धक्के के साथ प्रिया की गांड थप-थप कर रही थी।
सोनम बगल में बैठी अपनी चूत में उँगली डाले देख रही थी। मैंने उसका हाथ पकड़कर अपनी तरफ खींचा।
“आओ… ऊपर बैठो।”
सोनम मेरे चेहरे पर बैठ गई। उसकी गीली चूत मेरे मुँह पर आ गई। मैंने जीभ अंदर घुसाई और नीचे प्रिया को चोदता रहा। सोनम की चूत का पानी मेरे मुँह में बह रहा था। मैंने दोनों होंठ चूसे। सोनम की कमर मेरे मुँह पर रगड़ने लगी।
“आह्ह… राज… मेरी चूत चाटो… दीदी को चोदो… आआआह्ह्ह… और तेज…”
प्रिया के धक्के और तेज हो गए। मैंने उसकी कमर पकड़कर जोर-जोर से पेलना शुरू किया। हर धक्के के साथ उसकी गांड थप-थप कर रही थी और चूत से पानी छलक रहा था।
“फाड़ दो… मेरी चूत फाड़ दो… मादरचोद… और तेज… आआआह्ह्ह…”
मैंने सोनम को नीचे उतारा। अब सोनम को चोदने की बारी थी। मैंने उसे पेट के बल लिटाया। गांड ऊपर की। उसकी छोटी सी चूत मुँह फाड़े खड़ी थी। पानी से चमक रही थी। मैंने लंड लगाया।
“आह्ह… दर्द होगा… धीरे…”
मैंने धीरे धक्का मारा। सोनम की चूत बहुत टाइट थी। आधा लंड भी मुश्किल से गया। दीवारें इतनी तंग थीं कि लंड दब रहा था।
“उउउह्ह्ह… निकल जाएगा… धीरे… आआआह्ह्ह…”
मैंने रुका। फिर धीरे-धीरे पूरा घुसाया। सोनम की चीख निकल गई। मैंने प्रिया को बुलाया। प्रिया सोनम के पास आई और उसके होंठ चूमने लगी। दोनों बहनें एक दूसरे को चूम रही थीं जबकि मैं सोनम को चोद रहा था। प्रिया सोनम के दूध दबा रही थी।
“दीदी… राज मुझे चोद रहा है… तुम्हें भी चोदेगा… आआआह्ह्ह… कितना मोटा है…”
मैंने गति बढ़ाई। छप-छप… छप-छप… सोनम की गांड लाल हो गई। प्रिया ने सोनम की चूत का पानी चाटा जो बाहर निकल रहा था। मैंने सोनम की कमर पकड़कर और जोर से पेलना शुरू किया। हर धक्के के साथ सोनम की आवाज टूट रही थी।
मैंने पोजीशन बदली। सोनम को घोड़ी बना दिया। प्रिया उसके नीचे आ गई। दोनों की चूत एक के ऊपर एक। मैंने पहले सोनम को चोदा, फिर प्रिया को। बारी-बारी। दोनों की सिसकारियाँ मिल गईं। एक की चूत से लंड निकालकर दूसरी में घुसा देता। दोनों की चूत एक जैसी गीली और गरम थीं।
“आह्ह… दोनों की चूत… कितनी मस्त… आज दोनों को अपनी रंडी बनाऊंगा… चोदूंगा रोज…”
प्रिया ने कहा, “चोदो हमें… दोनों को चोदो… हम तुम्हारी हैं… आआआह्ह्ह…”
सोनम ने कहा, “और तेज… मेरी चूत फाड़ दो… दीदी की भी…”
मैंने पहली बार प्रिया की चूत में माल छोड़ा। गरम लावा अंदर भर गया। प्रिया काँप गई। उसकी चूत ने लंड को और जोर से जकड़ लिया।
“आह्ह… भर दिया… पूरा… गरम है…”
मैंने लंड निकाला। माल टपक रहा था। सफेद गाढ़ा वीर्य प्रिया की चूत से बाहर आ रहा था। सोनम ने झुककर चाट लिया। अपनी उँगली से निकाल-निकाल कर मुँह में डाल लिया।
फिर मैंने सोनम को चोदा। दूसरी राउंड में मैंने सोनम की चूत में भी माल डाला। सोनम की टाँगें काँप रही थीं। माल इतना था कि उसकी जाँघों तक बह गया।
दोनों बहनें बिस्तर पर पसीने से तरबतर लेटी थीं। चूत से माल रिस रहा था। कमरा चुदाई की महक से भरा था। मैंने दोनों को चूमा। पहले प्रिया, फिर सोनम।
“अगली बार तुम्हारी गांड भी मारूंगा। दोनों की।”
प्रिया ने मुस्कुराते हुए कहा, “हम तैयार रहेंगी।”
सोनम ने धीरे से कहा, “रोज आना… दोनों को चोदना… मैं भी तैयार हूँ…”
उस रात हम तीनों नंगे सो गए। सुबह फिर एक राउंड हुआ। इस बार मैंने दोनों को खड़ा करके दीवार से लगाकर चोदा। पहले प्रिया को, फिर सोनम को। फिर दोनों को बिस्तर पर लिटाकर 69 में दोनों को एक साथ चातना और चूसना। प्रिया मेरे लंड को चूस रही थी और सोनम मेरी गांड चाट रही थी। फिर मैंने दोनों की गांड में उँगली डाली और चूत चोदी।
जब मैं लौटा तो शरीर में दर्द था। लेकिन मन में सिर्फ एक बात थी। सामने वाला मकान अब सिर्फ घर नहीं, मेरी चुदाई की अड्डा बन चुका था। दोनों बहनें अब मेरी थीं।
अगले दिनों माता-पिता आने वाले थे। लेकिन दोनों बहनों ने कहा कि जब भी मौका मिलेगा, वो बुलाएँगी। और बुलाती रहीं। कभी अकेली प्रिया, कभी अकेली सोनम, कभी दोनों। हर बार नई पोजीशन, नई गालियाँ, नया मजा। कभी छत पर, कभी किचन में, कभी बाथरूम में। दोनों की चूत अब मेरे लंड की आदी हो चुकी थीं।
मैंने दोनों को अपनी जिंदगी का हिस्सा बना लिया। सामने वाली दोनों बहनें अब सिर्फ पड़ोसन नहीं, मेरी रंडियाँ बन चुकी थीं।