ढाबे के कमरे में अनन्या की रात – ट्रक ड्राइवर के साथ तीन बार चुदाई

ट्रेन फँस गई तो अनन्या को ढाबे के ऊपर वाले छोटे कमरे में रुकना पड़ा। राहुल ने कहा – “मैं फर्श पर सो जाऊँगा।” लेकिन बारिश की आवाज़, मोमबत्ती की रोशनी और अनन्या के भीगे स्तनों ने सब कुछ बदल दिया। रात में तीन बार हुआ… एक बार अनन्या उसके ऊपर चढ़कर चोद रही थी। पूरी कहानी सुनिए।

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Ananya

7/7/2026

मेरा नाम अनन्या है। उम्र २४ साल। बैंगलोर में सॉफ्टवेयर कंपनी में जॉब करती हूँ। पिछले हफ्ते मेरी चचेरी बहन के शादी का न्योता आया था राजस्थान के एक छोटे से कस्बे में। मैं अकेली ट्रेन से जा रही थी। बारात वाले दिन सुबह तक मौसम ठीक था, लेकिन दोपहर के बाद अचानक तेज़ बारिश शुरू हो गई और ट्रेन अचानक इमरजेंसी स्टॉप लगाकर रुक गई। आगे सिग्नल फेल हो गए थे और कुछ तकनीकी समस्या आ गई थी। ड्राइवर ने बताया कि कम से कम चार-पाँच घंटे रुकना पड़ेगा।

सभी यात्री घबरा गए। ड्राइवर ने कहा कि कम से कम चार-पाँच घंटे रुकना पड़ेगा। मैं अकेली लड़की थी, डर लग रहा था। पास में ही एक छोटा सा हाईवे ढाबा था। मैंने अपना सूटकेस उठाया और बारिश में भीगती हुई वहाँ पहुँच गई।

ढाबे की टीन की छत पर बारिश की आवाज़ इतनी तेज़ थी कि अंदर बोलना मुश्किल हो रहा था। अंदर दो-चार लोग बैठे थे। बाहर शेड के नीचे एक लंबा-चौड़ा आदमी खड़ा था। उसकी उम्र शायद २८-२९ के आसपास होगी। मोटा सा शरीर, काली टी-शर्ट, जींस, और बाजू पर एक बड़ा सा टैटू। वह ट्रक ड्राइवर लग रहा था। उसके पास एक पुराना सा बैग और हेलमेट पड़ा था।

मैं शेड के नीचे घुसते ही उसके कंधे से टकरा गई। मेरा सूटकेस उसके पैर पर पड़ गया।

“सॉरी… सॉरी… मैंने देखा नहीं,” मैंने घबराकर कहा।

उसने मेरी तरफ देखा। उसकी आँखें गहरी थीं। उसने धीरे से कहा, “कोई बात नहीं। बारिश में सब अंधेरा हो जाता है।”

मैंने शर्माते हुए पूछा, “आप यहाँ… मतलब ट्रक चला रहे हैं?”

उसने सिगरेट की जगह एक बीड़ी सुलगाई और कहा, “हाँ। राजस्थान-गुजरात रूट पर। बारिश ने सब रोक दिया। आप?”

मैंने बताया कि मैं शादी में जा रही हूँ और ट्रेन फँस गई है। वह मुस्कुराया, “शादी में जाने वाली लड़कियाँ अकेली ट्रेन में नहीं घूमतीं। बहादुर हो।”

बारिश और तेज़ हो गई। पानी शेड के किनारे से अंदर आ रहा था। मेरे कपड़े पूरी तरह भीग चुके थे। सफेद कुर्ती मेरे स्तनों पर चिपक गई थी और ब्रा का रंग साफ दिख रहा था। जींस इतनी भीग गई थी कि जांघों के बीच चिपक गई थी। मैं ठंड से काँप रही थी।

उसने देखा और अपनी गीली टी-शर्ट उतारकर मुझे दे दी। “पहन लो। ठंड लग जाएगी।”

मैंने शर्माते हुए कहा, “नहीं… आपकी टी-शर्ट…”

“पहन लो अनन्या। मैं आदमी हूँ, ठंड बर्दाश्त कर लूँगा।”

उसने मेरा नाम कैसे जाना? शायद मैंने खुद बता दिया था। मैंने उसकी टी-शर्ट पहन ली। उसकी गंध मेरे शरीर पर फैल गई। उसकी नजरें अब भी मेरे भीगे हुए स्तनों पर थीं।

ढाबे वाले ने कहा, “बारिश पूरी रात रुकने वाली नहीं लग रही। कमरे खाली नहीं हैं। सिर्फ एक छोटा सा कमरा बचा है… ऊपर।”

मैं घबरा गई। “मैं… अकेली…”

राहुल (उसका नाम राहुल था) ने कहा, “मैं फर्श पर सो जाऊँगा। आप बिस्तर पर। कोई परेशानी नहीं होगी।”

मैंने हाँ कर दी। हम दोनों ऊपर गए। छोटा सा कमरा था। एक पुराना बिस्तर, एक टेबल, और खिड़की जिससे बारिश की आवाज़ आ रही थी। बिजली चली गई थी। सिर्फ मोमबत्ती जल रही थी।

मैंने उसके सामने ही अपनी भीगी कुर्ती उतारी। मेरे स्तन अब सिर्फ ब्रा में थे। पानी की बूँदें मेरे cleavage से नीचे बह रही थीं। राहुल ने मुझे घूरा। उसकी आँखों में भूख थी।

“अनन्या… तुम बहुत खूबसूरत हो,” उसने धीरे से कहा।

मैं चुप रही। वह मेरे पास आया। उसने मेरे गीले बालों को पीछे किया और मेरे होंठों पर अपना मुँह रख दिया। पहला चुम्बन धीमा था, फिर तेज़ हो गया। उसकी जीभ मेरे मुँह में घुस गई। मैंने भी उसका साथ दिया।

उसने मेरा ब्रा उतारा। मेरे नंगे स्तनों को दोनों हाथों में लिया और जोर से दबाने लगा। फिर एक स्तन को मुँह में लेकर चूसने लगा। मैं सिसकारियाँ लेने लगी। “आह्ह… राहुल…”

उसने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया। मेरी जींस और पैंटी उतार दी। मेरी चूत पूरी तरह गीली थी। बारिश की आवाज़ के बीच उसने मेरी टाँगें खोलीं और अपनी जीभ मेरी चूत पर रख दी। वह जोर-जोर से चाट रहा था। उसकी दाढ़ी मेरी जांघों पर रगड़ खा रही थी। मैं बिस्तर पर तड़प रही थी। “उह्ह्ह… और जोर से… कृपया…”

उसने अपनी पैंट उतारी। उसका लंड मोटा और लंबा था। नसें उभरी हुई थीं। मैंने उसे अपने मुँह में लिया। वह मेरे बाल पकड़कर मेरे मुँह में धक्के मार रहा था। “हाँ… ऐसे ही… तेरी जुबान बहुत गर्म है…”

फिर उसने मुझे उठाया और खिड़की के पास ले गया। बारिश खिड़की पर जोर से पड़ रही थी। उसने मुझे दीवार से टिकाया और मेरी एक टाँग उठाकर अपनी कमर पर रख दी। फिर एक जोरदार धक्के से उसने अपना लंड मेरी चूत में घुसा दिया।

“आह्ह्ह्ह!” मैं चीख पड़ी।

वह जोर-जोर से चोदने लगा। हर धक्के के साथ मेरा शरीर दीवार से टकरा रहा था। बारिश की आवाज़, बिस्तर की चरमराहट, और मेरी चीखें सब मिलकर कमरे में गूँज रही थीं। वह मेरे स्तनों को मसलता हुआ चोद रहा था।

“राहुल… और जोर… मुझे और चाहिए…” मैं बिलख रही थी।

उसने मुझे बिस्तर पर लिटाया और मेरे ऊपर चढ़ गया। इस बार धीरे-धीरे लेकिन गहराई से धक्के मार रहा था। मैं उसके कंधे नाखूनों से नोच रही थी। अचानक मेरे शरीर में एक तूफान आ गया। मेरी चूत से पानी का फव्वारा छूट गया। मैं काँपते हुए चीखी। वह मुस्कुराया और और तेज़ हो गया।

दूसरी बार उसने मुझे घुटनों के बल कर दिया। मेरे बाल पकड़कर पीछे खींचे और कुत्ते जैसी पोजीशन में चोदने लगा। इस बार और गहरा और तेज़। मैं बिस्तर के किनारे से टकरा रही थी। “आह्ह… उह्ह… मेरा हो गया… राहुल…”

वह भी जोर से धक्का मारकर अंदर ही झड़ गया। गर्म-गर्म तरल मेरी चूत में भर गया।

हम दोनों पसीने और बारिश के पानी से भीगे हुए एक-दूसरे से लिपटकर लेट गए। बारिश अभी भी कम नहीं हुई थी।

रात में दो बार और हुआ। एक बार मैं उसके ऊपर चढ़कर चोद रही थी, दूसरी बार वह मेरे मुँह में झड़ गया। हर बार बारिश की आवाज़ हमारे साथ थी।

सुबह जब बारिश रुकी तो वह मुझे ट्रेन स्टेशन तक छोड़ने आया। जाने से पहले उसने मेरे होंठों पर चूमते हुए कहा, “अगली बार जब बारिश आए… मुझे याद करना।”

मैं शादी में गई, लेकिन पूरी रात मुझे सिर्फ राहुल और उसकी मोटी लंड की याद आती रही।