कॉलेज की सख्त टीचर की गीली चूत – फेल स्टूडेंट की असली सजा

कॉलेज की सबसे डरावनी और सख्त टीचर ने एक फेल स्टूडेंट को ऑफिस में बुलाया सजा देने के लिए। टीचर ने सोचा था कि वो स्टूडेंट को डरा देगी और सब कुछ कंट्रोल में रखेगी, लेकिन स्टूडेंट ने उसकी सख्ती को चुनौती दी। पहले टीचर ने गुस्सा दिखाया, मना किया और excuses दिए। पर स्टूडेंट की धीमी और लगातार कोशिशों ने टीचर की दीवारें तोड़नी शुरू कर दीं। धीरे-धीरे टीचर का शरीर काँपने लगा, उसकी चूत गीली होने लगी और पिघल गई। ऑफिस की मेज पर शुरू हुआ लंबा और सेंसुअल फोरप्ले – टीचर के स्तन चूसना, चूत चाटना और दोनों के बीच गंदी बातें। आखिरकार सजा चुदाई में बदल गई। टीचर, जो कभी इतनी सख्त थी, अब स्टूडेंट के लंड की कुतिया बनकर moaning कर रही थी

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Arjun

7/27/2026

मैं अर्जुन हूँ, इक्कीस साल का कॉलेज का फाइनल ईयर स्टूडेंट। हमारे शहर के इस छोटे से प्राइवेट कॉलेज में इंग्लिश लिटरेचर की टीचर मिसेज प्रिया शर्मा सबसे ज्यादा डरावनी और सख्त मानी जाती थीं। उम्र उनकी सैंतीस के आसपास थी, शादीशुदा, लेकिन पति ज्यादातर बाहर रहते थे। कॉलेज में वो हमेशा साड़ी में आतीं, बालों को टाइट बन में बाँधे, चश्मा लगाए, और चेहरे पर वो सख्ती जो देखते ही पाँव काँपने लगते। उनकी आँखें तेज थीं, आवाज में कोई गर्माहट नहीं, बस आज्ञा और डाँट।

मैं उनके सब्जेक्ट में फेल होने वाला था। मिड-टर्म में मेरे नंबर बहुत कम आए थे। एक दिन क्लास के बाद उन्होंने मुझे बुलाया। ऑफिस में अकेले बैठी थीं, टेबल पर मेरी कॉपी रखी हुई थी।

“अर्जुन, तुम्हारे नंबर देखे? अगर इसी तरह चला तो फेल हो जाओगे। एक्स्ट्रा असाइनमेंट दूँगी, और हर रोज मेरे ऑफिस आना पड़ेगा। समझ गए?”

मैंने सिर झुकाकर हाँ कहा, लेकिन मन में कुछ और चल रहा था। उनकी साड़ी की पल्लू थोड़ी खिसकी हुई थी, गले का हिस्सा साफ दिख रहा था। उम्र के बावजूद उनके स्तन भरे हुए और तने हुए लग रहे थे। मैंने सोचा, ये सख्ती दिखाने वाली औरत अगर एक बार पिघल जाए तो कितनी गर्म होगी। लेकिन बाहर से मैंने सिर्फ माफी माँगी और असाइनमेंट ले लिया।

पहली मुलाकात के बाद मैंने सोचा, धीरे-धीरे बात बढ़ानी होगी। अगले दिन मैंने ऑफिस में एक कप चाय लेकर गया। उन्होंने पहले तो मना कर दिया, फिर थोड़ी देर बाद ले ली। मैंने कहा, “मैडम, आपकी वजह से मुझे इंग्लिश में इंटरेस्ट आने लगा है।”

“चाय के लिए शुक्रिया। अब जाओ, असाइनमेंट पूरा करके लाओ।”

उनकी आवाज में कोई गर्माहट नहीं थी। मैं बाहर आया तो मन में गुस्सा और लस्ट दोनों थे। रात को लंड मसलते हुए सोचा, एक दिन ना एक दिन ये अपनी सख्ती उतारेंगी।

दूसरे दिन मैंने फिर ऑफिस में जाने का बहाना बनाया। इस बार उन्होंने मुझे अंदर बुलाया और कुछ पुराने पेपर दिखाए। मैंने उनकी मदद करने का नाटक किया, कंप्यूटर पर कुछ फाइलें खोलीं। उनके हाथ मेरे हाथ से टकराए। उन्होंने तुरंत हाथ खींच लिया।

“अर्जुन, तुम्हें सिर्फ स्टडी करनी है। ये सब मत करो। मैं तुम्हारी टीचर हूँ।”

मैंने माफी माँगी, लेकिन मन में सोचा, हाथ खींच लिया, मतलब डर लग रहा है। उस दिन मैंने उनको एक किताब की सिफारिश की जो उन्हें पसंद आई। उन्होंने थोड़ी देर बात की, लेकिन फिर बोलीं, “बस, अब जाओ। मेरे पति शाम को आ रहे हैं।”

तीसरे दिन मैंने जानबूझकर लेट पहुँचा। ऑफिस में अकेली थीं। बारिश हो रही थी, पंखे की आवाज के साथ छत पर पानी की बूँदें गिर रही थीं। मैंने कहा, “मैडम, कल मैंने वो किताब पढ़ी, सच में बहुत अच्छी है। आपकी सलाह से मुझे बहुत मदद मिली।”

उन्होंने थोड़ी मुस्कुराहट दी, पहली बार। लेकिन फिर सख्त हो गईं। “अच्छी बात है। लेकिन याद रखो, तुम अभी भी फेल के कगार पर हो।”

मैंने उनसे पूछा कि उनका पति कितने दिन रहते हैं। उन्होंने तुरंत मुस्कुराहट गायब कर दी।

“ये सवाल तुम्हें नहीं पूछना चाहिए। मेरी जिंदगी में तुम्हारा कोई दखल नहीं। जाओ अब।”

मैं बाहर आया तो समझ गया कि दीवार बहुत मोटी है। लेकिन मैंने हार नहीं मानी। अगले हफ्ते में मैंने उन्हें दो बार और मिलने का मौका बनाया। एक बार कॉलेज के छोटे से इवेंट में मदद की, दूसरी बार उनकी कार की बैटरी डाउन हो गई तो मैंने जंप स्टार्ट कर दी। उन्होंने शुक्रिया कहा, लेकिन आँखों में अभी भी सख्ती थी।

चौथे हफ्ते में मैंने हिम्मत करके उनको सीधा कॉम्प्लिमेंट दिया। ऑफिस में अकेले थे। मैंने कहा, “मैडम, आप इतनी सख्त क्यों लगती हैं? असल में आप बहुत खूबसूरत हो।”

“अर्जुन! ये क्या बोल रहे हो? मैं तुम्हारी टीचर हूँ। मेरे पति हैं। ये सब बंद करो, वरना मैं प्रिंसिपल से शिकायत कर दूँगी।”

मैंने हाथ जोड़कर माफी माँगी, लेकिन अंदर से समझ गया कि अब टेंशन बन रही है। उन्होंने मुझे दो दिन के लिए ऑफिस आने से मना कर दिया। मैंने सोचा, अब या कभी नहीं।

पाँचवें हफ्ते में बारिश बहुत तेज थी। कॉलेज लगभग खाली था। मैंने जानबूझकर लेट पहुँचा। ऑफिस का दरवाजा बंद था। मैंने दस्तक दी। उन्होंने अंदर बुलाया। कमरे में सिर्फ टेबल लैंप जल रहा था, पंखा धीरे चल रहा था।

मैंने सीधा कहा, “मैडम, मैं आपको चाहता हूँ। ये फेल होने का डर नहीं, ये आपका डर है जो मुझे रातों को नींद नहीं आने देता।”

“बाहर जाओ! अभी! मैं शादीशुदा हूँ। ये गलत है। अगर तुमने एक कदम और बढ़ाया तो मैं पुलिस में रिपोर्ट कर दूँगी।”

मैंने उनके हाथ पकड़ लिए। उन्होंने जोर से झटका मारा, लेकिन मैंने नहीं छोड़ा। आँखों में आँसू आ गए थे उनकी।

“अर्जुन... प्लीज... मत करो। मैं नहीं कर सकती। मेरी जिंदगी बर्बाद हो जाएगी।”

मैंने धीरे से उनके कंधे पर हाथ रखा। “मैडम, मैं आपको दर्द नहीं दूँगा। बस एक बार...”

उन्होंने मुझे धक्का दिया, लेकिन कमजोर था। मैंने उन्हें दीवार से लगाया और उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। पहले तो उन्होंने जोर से विरोध किया, हाथों से मुझे धक्का दिया, लेकिन फिर धीरे-धीरे उनका शरीर ढीला पड़ने लगा।

“नहीं... अर्जुन... ये गलत... आह्ह... रुको...”

मैंने उनकी साड़ी का पल्लू खींचा। उन्होंने फिर से हाथ पकड़ लिया। “नहीं... प्लीज...”

लेकिन अब उनकी साँसें तेज हो चुकी थीं। मैंने उनके गले पर चूम लिया। उन्होंने आँखें बंद कर लीं।

“आह्ह... ये मत करो... मैं... मैं रजिस्ट नहीं कर पा रही...”

मैंने उनकी साड़ी धीरे-धीरे खोली। अंदर ब्लाउज और पेटीकोट था। ब्लाउज के हुक खोले। उनके स्तन बाहर आए – बड़े, भरे हुए, निप्पल काले और तने हुए। मैंने एक को मुँह में लिया और चूसने लगा।

“आआआह्ह्ह... अर्जुन... नहीं... ओह्ह्ह...”

उनके हाथ मेरे बालों में उलझ गए। मैंने दूसरा स्तन भी चूसा, जीभ से निप्पल घुमाया। उन्होंने सिसकारियाँ भरीं।

“आह्ह... धीरे... बहुत संवेदनशील है... आआआह्ह्ह...”

मैंने उनकी साड़ी और पेटीकोट पूरी तरह उतार दी। अब वो सिर्फ पैंटी में थीं। मैंने पैंटी के ऊपर से ही उनकी चूत को रगड़ना शुरू किया। कपड़ा गीला हो चुका था।

“नहीं... अंदर मत छुओ... आह्ह... मैं गीली हो रही हूँ...”

मैंने पैंटी उतारी। उनकी चूत साफ दिख रही थी – गुलाबी, थोड़ी सी बालों वाली, और पहले से ही चमकदार गीली। मैंने घुटनों के बल बैठकर उनकी चूत को सूँघा। खुशबू बहुत तेज और मादक थी। फिर जीभ से चाटना शुरू किया।

“आआआह्ह्ह्ह... ओह्ह्ह्ह... अर्जुन... ये क्या कर रहे हो... आह्ह... चाटो... और चाटो...”

मैंने उनकी चूत के होठों को अलग किया और अंदर जीभ घुसाई। उनका क्लिट सूजा हुआ था। मैंने उसे चूसा और जीभ से रगड़ा। उन्होंने अपनी कमर उठा दी।

“आह्ह... हाँ... वहीं... आआआह्ह्ह... मैं... मैं झड़ने वाली हूँ...”

उनका शरीर काँपने लगा और उन्होंने मेरे मुँह पर जोर से चूत दबा दी। गर्म पानी जैसा रस मेरे मुँह में भर गया। मैंने सब पी लिया।

“आह्ह... इतना अच्छा... पहले कभी नहीं...”

अब मेरी बारी थी। मैंने अपना लंड बाहर निकाला – मोटा, तना हुआ, नसों से भरा। उन्होंने आँखें खोलीं और देखा।

“इतना बड़ा... अर्जुन... ये मेरे अंदर कैसे जाएगा...”

मैंने उनका मुँह अपने लंड के पास लाया। उन्होंने पहले तो मना किया, लेकिन फिर धीरे से होंठ खोले और सिरे को चूमा।

“उउउउह्ह्ह... मोटा है... ग्लप-ग्लप...”

मैंने उनके सिर को पकड़कर थोड़ा आगे बढ़ाया। उनका मुँह गर्म था। उन्होंने आधा लंड मुँह में लिया और चूसने लगीं। गले तक जाने पर वो खाँसने लगीं, लेकिन रुकीं नहीं।

“आह्ह... भोसड़ी के... और गहरा... ग्लप... ग्लप...”

मैंने उन्हें टेबल पर लिटाया। उनके पैर फैलाए। लंड का सिरा उनकी चूत के होठों पर रखा।

“अंदर डालो... अब और नहीं रुक सकती... आआआह्ह्ह...”

मैंने एक जोरदार धक्का मारा। आधा लंड अंदर चला गया। उनकी चूत बहुत टाइट थी।

“आआआह्ह्ह्ह... दर्द... बहुत दर्द... निकालो... आह्ह...”

मैंने रुका नहीं। दूसरा धक्का और जोर से मारा। पूरा लंड अंदर घुस गया। उनकी चूत की गर्म दीवारें मेरे लंड को कस रही थीं।

“आह्ह... हाँ... अब... अब चोदो... मेरी चूत फाड़ दो... आआआह्ह्ह...”

मैंने उनकी कमर पकड़कर जोर-जोर से धक्के मारने शुरू किए। हर धक्के के साथ छप-छप की गीली आवाज कमरे में गूँज रही थी। उनकी गांड थप-थप कर रही थी।

ये चूत कितनी टाइट है... सख्त टीचर आज मेरी रंडी बन गई...

उन्होंने अपने पैर मेरी कमर में लपेट लिए।

“और तेज... भोसड़ी के... फाड़ दे... आआआह्ह्ह... मैं तेरी कुतिया हूँ...”

मैंने उनकी टाँगें अपने कंधों पर रखीं और और गहरा घुसने लगा। उनकी चूत से सफेद झाग निकल रहा था।

“आह्ह... देखो... कितना गीला कर दिया... आआआह्ह्ह...”

पहली बार उन्होंने जोर से चीखकर झड़ना शुरू किया। उनका पूरा शरीर काँप रहा था।

“आआआह्ह्ह... आ गया... आ गया...”

मैंने भी जोर से धक्का मारा और अंदर ही झड़ गया। गर्म माल उनकी चूत में भर दिया।

“आह्ह... गर्म... अंदर भर गया...”

मैंने लंड बाहर निकाला। चूत से मेरा माल और उनका रस मिलकर बह रहा था। उन्होंने उंगली से थोड़ा उठाकर मुँह में डाला।

“स्वाद... अजीब... लेकिन अच्छा...”

हम दोनों पसीने से तर थे। ऑफिस में पंखा चल रहा था, बाहर बारिश की आवाज आ रही थी। अचानक दूर से किसी के कदमों की आवाज आई। हम दोनों घबरा गए।

“कौन आ रहा है... जल्दी कपड़े पहनो...”

हमने जल्दी-जल्दी कपड़े पहने। उनकी साड़ी ठीक से नहीं सिमटी। बाल बिखरे हुए थे। मैंने उन्हें चूमा।

“मैडम... ये खत्म नहीं हुआ।”

उन्होंने आँखें नीची कर लीं।

“जानती हूँ... लेकिन ये कभी किसी को पता नहीं चलना चाहिए। कल फिर आना... एक्स्ट्रा क्लास के लिए।”

मैं बाहर निकला तो मन में सोच रहा था – सख्त टीचर आज मेरी हो गई। और ये सजा... असली सजा तो अभी शुरू हुई है।