पति बाहर था, मैंने भाभी की चूत फोड़ दी और अंदर माल छोड़ा
भाई की नौकरी के सिलसिले में ज्यादातर बाहर रहने की वजह से घर में अकेली रहने वाली मेरी हॉट भाभी अनीता को मैंने किचन में ही बहका लिया। रात भर कई राउंड्स में मैंने उनकी कसी चूत और मोटी गांड दोनों मारी, मुंह में लंड दिया और आखिर में चूत में ही अपना गरम माल छोड़ा। उस रात के बाद भाभी मेरी पर्सनल रंडी बन गई – रोज चुदने के लिए तैयार।
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Rahul
7/23/2026
मैं राहुल हूँ, २२ साल का। मेरे भाई की शादी को चार साल हो चुके थे और वो ज्यादातर समय बाहर ही रहता था नौकरी के सिलसिले में। घर पर सिर्फ मैं और मेरी भाभी अकेले। भाभी का नाम अनीता था। उम्र २८ साल, लेकिन शरीर देखकर लगता ही नहीं था। गोरी चमड़ी, चेहरा चमकदार, स्तन इतने भारी कि नाइट सूट में भी अंदर से उभरते रहते थे। कमर पतली और नीचे से गांड ऐसी कि चलते वक्त लहराती रहती थी।
शुरू से ही मेरी नजर उस पर टिकी रहती थी। रोज रात को मैं बाथरूम में जाकर उसकी याद में मुठ मारता। कल्पना करता कि काश वो मेरी हो जाए। भाई के जाने के बाद घर का माहौल बदल गया था। भाभी भी अकेलापन महसूस करती थी, ये मैं देख सकता था।
एक शाम भाभी रसोई में खाना बना रही थी। हल्का सा लाल नाइट गाउन पहना हुआ था। गाउन इतना पतला था कि पीछे से उसकी गांड की दरार साफ दिख रही थी। मैं चुपके से पीछे आया और बोला, “भाभी, आज खाना बहुत अच्छी महक आ रही है।”
वो हल्का मुस्कुराई, “बैठो राहुल, सर्व करती हूँ।”
मैं उसके करीब खड़ा रहा। उसकी शरीर की खुशबू मुझे पागल कर रही थी। अचानक मैंने उसकी कमर पर हाथ रख दिया। वो चौंक गई, “राहुल! क्या कर रहे हो? छोड़ो ना!”
मैंने हाथ नहीं हटाया। “भाभी तुम बहुत प्यारी हो। भाई तुम्हें समय ही नहीं देता। मैं देखता हूँ तुम कितनी प्यासी हो।”
वो घबरा गई, “नहीं राहुल, ये गलत है। मैं तुम्हारी भाभी हूँ।”
लेकिन मैंने और जोर से उसकी कमर दबा ली। उसकी सांस तेज हो गई। मैंने धीरे से उसके कान में कहा, “एक बार तो मुझे आजमा के देख लो भाभी। अगर पसंद नहीं आया तो मैं कभी नहीं छूऊंगा।”
वो चुप रही। मैंने उसकी गर्दन पर होंठ रख दिए। वो सिसक गई, “आह्ह... राहुल मत करो।”
मैंने उसके स्तन पर हाथ रखा और दबाया। उसके निप्पल पहले से ही कड़े हो चुके थे। मैंने गाउन के अंदर हाथ डाल दिया। उसके नरम, गर्म स्तन मेरे हाथ में आ गए। भाभी ने आँखें बंद कर लीं, “आह्ह्ह... ये गलत है... छोड़ दो।”
लेकिन मैंने नहीं छोड़ा। मैंने उसके निप्पल को उंगलियों से घुमाया। वो काँपने लगी। मैंने दूसरा हाथ उसकी गांड पर रखा और जोर से दबाया।
“भाभी तेरी गांड कितनी मोटी है... भाई को छोड़कर मुझे दे दो।”
वो सांस लेते हुए बोली, “राहुल... प्लीज... कोई देख लेगा।”
मैंने उसे दीवार से लगाया और उसके होंठों पर जबरदस्ती किस कर लिया। पहले वो विरोध कर रही थी, लेकिन धीरे-धीरे उसके होंठ खुलने लगे। मेरी जीभ उसके मुंह में घुस गई। वो धीरे-धीरे जवाब देने लगी।
मैंने गाउन ऊपर खींचा। उसके सफेद, मुलायम स्तन बाहर आ गए। मैंने एक निप्पल मुंह में लिया और चूसने लगा। भाभी की सिसकारियाँ बढ़ गईं, “आह्ह्ह... उउउउ... राहुल... मत करो... आह्ह्ह...”
मैंने दूसरा स्तन भी चूसा। उसके स्तन लार से गीले हो गए। मैंने घुटनों के बल बैठकर गाउन पूरी तरह ऊपर उठा दिया। उसके अंदर कुछ नहीं था। गुलाबी, साफ चूत सामने थी। थोड़ी सी बाल भी थे। मैंने उसकी चूत पर उंगली फेरी।
“भाभी तेरी चूत पहले से ही गीली है।”
वो शर्मा गई, “नहीं... ऐसा मत बोलो।”
मैंने उसकी चूत के होठ खोले और अंदर उंगली डाली। वो गीली थी। मैंने उंगली अंदर-बाहर की। भाभी की साँस फूलने लगी, “आह्ह्ह... आह्ह्ह... राहुल... प्लीज... आह्ह्ह...”
मैंने अपनी उंगली बाहर निकाली और चखी। स्वाद मीठा था। फिर मैंने उसकी चूत चाटनी शुरू कर दी। जीभ से उसके क्लिट को रगड़ने लगा। भाभी ने मेरे बाल पकड़ लिए, “आह्ह्ह... उउउउ... चाटो... आह्ह्ह... चूत चाटो मेरी... आह्ह्ह...”
मैंने जीभ अंदर घुसा दी। वो चीखने लगी। उसके पैर काँप रहे थे। मैंने दो उंगलियाँ अंदर डाल दीं और तेजी से हिलाने लगा। साथ में क्लिट चूसता रहा।
“आह्ह्ह... आह्ह्ह... राहुल... मैं मर जाऊंगी... आह्ह्ह... और जोर से... आह्ह्ह...”
उसके शरीर में झटके आने लगे। वो चिल्लाई, “आह्ह्ह... आह्ह्ह... निकल रहा है... आह्ह्ह...” और उसके चूत से पानी छूट गया। मैंने सब पी लिया।
मैं खड़ा हुआ। मेरा लंड तना हुआ था। भाभी ने मेरी पैंट खोली और लंड बाहर निकाला। उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं। “इतना मोटा... आह्ह...”
उसने लंड मुंह में लिया। पहले धीरे-धीरे, फिर गले तक। मैंने उसके बाल पकड़कर धक्के मारे। वो गग कर रही थी लेकिन चूस रही थी। लार उसके स्तनों पर गिर रही थी।
“भाभी तेरी मुँह की चुदाई भी मस्त है।”
वो आँखें उठाकर देखने लगी। मैंने लंड उसके मुंह से निकाला। अब असली चुदाई का समय था।
मैंने उसे बेडरूम में ले जाकर बिस्तर पर लिटा दिया।
उसकी टांगें खोलीं।
लंड चूत के मुंह पर रखा। भाभी बोली, “राहुल... धीरे... मैं... आह्ह...”
मैंने एक जोरदार धक्का मारा। लंड आधा अंदर घुस गया। भाभी चीख पड़ी, “आह्ह्ह... दर्द... आह्ह्ह... निकालो... आह्ह्ह...”
मैंने नहीं निकाला। धीरे-धीरे और धक्के मारे। लंड पूरा अंदर घुस गया। भाभी की चूत कसी हुई थी। मैंने तेजी से पेलना शुरू कर दिया।
“आह्ह्ह... आह्ह्ह... राहुल... आह्ह्ह... तेरे लंड ने फाड़ दी... आह्ह्ह... और जोर से... आह्ह्ह...”
हर चार-पाँच धक्कों के बाद वो सिसकारियाँ भरने लगती। मैंने उसकी टांगें अपने कंधों पर रखीं और और गहरा पेलने लगा। चूत की गीली आवाजें पूरे कमरे में गूँज रही थीं।
“भोसड़ी के... तेरी चूत कितनी टाइट है... मादरचोद... आह्ह...”
भाभी भी गंदी बातें करने लगी, “आह्ह्ह... चोदो मुझे... फाड़ दो चूत... आह्ह्ह... मैं तेरी रंडी हूँ... आह्ह्ह... और तेज... आह्ह्ह...”
मैंने उसे घुमाकर डॉगी स्टाइल में कर दिया। गांड ऊपर करके लंड पीछे से घुसाया। एक हाथ से उसके बाल पकड़े और दूसरे से गांड थपथपाने लगा।
“आह्ह्ह... आह्ह्ह... गांड भी मार दो... आह्ह्ह... मादरचोद... आह्ह्ह...”
मैंने और जोर से धक्के मारे। उसकी गांड लाल हो गई। चूत से पानी टपक रहा था।
पहला राउंड खत्म होने से पहले मैंने लंड बाहर निकाला और भाभी के स्तनों पर माल गिरा दिया। वो उंगली से माल उठाकर मुंह में डालने लगी।
“स्वाद अच्छा है ना भाभी?”
वो शरारत से बोली, “आह्ह... हाँ... अब फिर से चोदो।”
दूसरा राउंड शुरू हुआ। इस बार मैंने उसे दीवार से लगाकर खड़ा किया। एक टांग उठाकर लंड अंदर घुसाया। भाभी मेरे गले में सिर रखकर सिसकारियाँ भर रही थी।
“आह्ह्ह... आह्ह्ह... राहुल... तेरे लंड ने मुझे पागल कर दिया... आह्ह्ह... रोज चोदना... आह्ह्ह...”
मैंने तेजी से पेला। उसके स्तन मेरे सीने से रगड़ खा रहे थे।
तीसरा राउंड बेड पर। इस बार मैंने उसकी गांड में लंड डालने की कोशिश की। पहले तो वो मना करने लगी, “नहीं... गांड में दर्द होगा... आह्ह...” लेकिन जब लंड का सिरा घुसा तो वो चीखने लगी, “आह्ह्ह... फट गई... आह्ह्ह... धीरे... आह्ह्ह...”
मैंने धीरे-धीरे गांड मारी। भाभी को दर्द के साथ मजा भी आने लगा। वो खुद बोलने लगी, “आह्ह्ह... गांड मारो... आह्ह्ह... मैं तेरी कुतिया हूँ... आह्ह्ह...”
आखिरी राउंड में मैंने उसकी चूत में ही माल छोड़ा। भाभी ने पैर मेरे कमर में लपेट रखे थे। जब मैं झड़ रहा था तो वो भी चीख रही थी, “आह्ह्ह... अंदर डालो... आह्ह्ह... गर्भवती कर दो... आह्ह्ह...”
माल चूत में भर गया। जब लंड निकाला तो चूत से माल बहने लगा। भाभी ने उंगली डालकर माल निकाला और चाट लिया।
हम दोनों पसीने से तर होकर लेट गए। भाभी मेरे सीने पर सिर रखकर बोली, “राहुल... अब ये रोज होगा। भाई जब भी बाहर जाएगा, तू मुझे चोदेगा। मैं तेरी रंडी बन गई हूँ।”
मैंने उसके स्तन दबाए और कहा, “हाँ भाभी। अब तेरी चूत और गांड दोनों मेरी हैं। रोज चोदूंगा।”
वो मुस्कुराई और मेरे लंड को हाथ में लेकर बोली, “अभी भी खड़ा है... फिर से चोदो ना।”
मैं फिर से उसके ऊपर चढ़ गया।