पूनम का दूसरा जन्मदिन गिफ्ट: वर्जिन चूत + गांड दोनों एक ही रात

अगले साल पूनम का जन्मदिन फिर आया। इस बार राहुल ने सिर्फ एक छोटा सा गिफ्ट दिया – एक काला रेशमी स्कार्फ। “आज रात इसे आँखों पर बाँधना।” रात के दो बजे फिर वही कार। पूनम ने स्कार्फ बाँध लिया। राहुल ने पहले उसकी चूत चोदी – इस बार बिना किसी दर्द के, सिर्फ मजे के साथ। जब पूनम झड़ रही थी, तभी राहुल ने लंड निकाला और बिना बताए उसकी गांड में घुसा दिया। पूनम चीख उठी – “आह्ह… गांड… राहुल… गांड में…” पर राहुल रुका नहीं। एक ही रात में उसने पूनम की चूत और गांड दोनों को इतना चोदा कि कार की सीट फिर लाल हो गई। जब आँखों से स्कार्फ हटा, तो पूनम की आँखों में आँसू थे… और मुस्कुराहट भी। उसने राहुल के गले में हाथ डालकर कहा, “अगले जन्मदिन पर… दोनों छेद एक साथ चोदना… एक ही लंड से।”राज प्रिया का हाथ पकड़ता है। पहले हल्का किस, फिर उनके स्तनों पर हाथ। फिर राज घुटनों के बल बैठ जाता है और प्रिया की टाँगें फैला देता है। उनकी जीभ प्रिया को अंदर तक छूती है। प्रिया खुद राज के ऊपर सवार हो जाती है और दोनों एक-दूसरे के शरीर में डूब जाते हैं। जब राज प्रिया के सबसे गहरे हिस्से में अपना सब कुछ छोड़ देता है, तो प्रिया को एहसास होता है — यह रात अकेली नहीं रहेगी। सुनिए पूरी गर्म और रोमांचक कहानी।

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Rahul

7/11/2026

नमस्ते, मैं राहुल हूँ। झारखंड के धनबाद शहर का रहने वाला, उम्र बाईस साल, हाइट पाँच फुट आठ इंच, गोरा रंग और इंजीनियरिंग पूरी करके अभी-अभी डिग्री हाथ में आई थी। साल दो हजार तेरह की बात है। मेरी जिंदगी में पहली बार कोई लड़की आई थी जिसका नाम था पूनम। गोरी-चिट्टी, गोल-गोल गाल, पतली कमर, और जो स्तन थे वे जैसे दो नरम-मुलायम आम। हम दोनों वर्जिन थे। दोनों के अंदर सिर्फ जवानी की आग थी, अनुभव नहीं। कुछ ही दिन पहले हमने एक-दूसरे को अपना माना था और ठीक उसी हफ्ते उसका जन्मदिन आने वाला था।

जन्मदिन से तीन दिन पहले मैंने सोचा कुछ ऐसा दूँ जो सिर्फ उसके लिए हो। एक छोटी-सी सिल्वर चेन ली जिसके पेंडेंट पर उसका नाम खुदा था और साथ में एक छोटा सा काला बॉक्स जिसमें लेस वाला ब्रा और पैंटी का सेट रखा। शाम को हम पार्क में घूम रहे थे। वापस आते वक्त मैंने कार रोक दी और पैकेट उसके हाथ में थमा दिया। उसने पहले चेन खोली, मुस्कुराई, फिर काला सेट देखा तो गाल लाल हो गए। आँखें झुका लीं। “राहुल… ये… ये क्या है?” मैंने उसके कान के पास मुँह लाकर धीरे से कहा, “तेरे जन्मदिन का असली तोहफा। रात को पहनना।” वह कुछ नहीं बोली। बस मेरा हाथ पकड़ा और कार से बाहर खींच लिया। सड़क के किनारे एक पुराना मकान था, उसके पीछे घना अँधेरा। वहाँ ले जाकर उसने मुझे दीवार से सटा दिया। दोनों आँखें बंद हो गईं। होंठ मिले।

पहली किस। नरम, गुनगुने, थोड़े से काँपते हुए होंठ। मैंने जीभ से उसके होंठ खोले। वह घबराई नहीं, बल्कि अपनी जीभ अंदर डाल दी। दो मिनट… तीन मिनट… हम बस एक-दूसरे को चूस रहे थे। मेरा हाथ खुद-ब-खुद उसकी कमर पर चला गया, फिर ऊपर। ब्लाउज के ऊपर से ही उसके स्तनों को हल्के से दबाया। वह कराह उठी। उसकी साँस तेज हो गई। मेरे पैंट में लंड सीधा खड़ा हो चुका था। अचानक कोई आवाज आई, हम झट से अलग हो गए। दोनों के होंठ गीले, आँखें चमकती हुईं। उस दिन के बाद रोज की किसिंग हो गई। कभी कॉलेज के पीछे, कभी उसकी गली के अँधेरे कोने में, कभी कार में। धीरे-धीरे मैं उसके ब्लाउज के अंदर हाथ डालने लगा। उसके स्तन नरम मक्खन जैसे थे और निप्पल्स इतने कड़े कि उंगली से छूते ही वह काँप जाती। मैं चूसता, वह मेरे बाल नोचती। कभी-कभी उसकी जाँघों के बीच हाथ फिराता तो पैंटी पूरी गीली मिलती। “राहुल… मत कर… कोई देख लेगा…” पर उसकी आवाज में मना करने का स्वर नहीं, बल्कि और छूने की भीख होती।

उन्नीस अगस्त दो हजार तेरह। जन्मदिन का दिन। दिन भर पार्टी, केक, गिफ्ट। रात को हम दोनों फोन पर थे। मैं बिस्तर पर लेटा हुआ, लंड हाथ में, उसकी आवाज सुन-सुन कर हिला रहा था। अचानक मुँह से निकल गया, “पूनम… करना है मुझे… आज ही… अभी।” वह चुप रही। फिर धीरे से बोली, “कहाँ… कैसे? रात के दो बजे हैं राहुल…” “मैं आता हूँ। तू चुपके से बाहर आ जाना। नाइट ड्रेस में। और… वो काला सेट पहनना जो मैंने दिया था।” “पागल है क्या? पापा-मम्मी…” “बस दस मिनट। कोई नहीं देखेगा। प्लीज… मेरी जान… आज तेरा जन्मदिन है… मुझे तेरी वर्जिन चूत चाहिए।” वह साँस रोककर बोली, “…आ जा।”

मैंने चुपके से पापा की कार की चाबी निकाली। गेट खोला, दस मिनट में उसके घर के बाहर पहुँच गया। कॉल किया। थोड़ी देर बाद वह बाहर निकली। रात की हल्की रोशनी में उसने काला लेस वाला नाइट ड्रेस पहना था। पतला, लगभग पारदर्शी। अंदर काला ब्रा-पैंटी का सेट चमक रहा था। स्तन आधे बाहर, निप्पल्स कड़े। कमर पतली, गांड गोल-गोल। बाल खुले, होंठ गुलाबी। मैं कार से उतरा ही नहीं… बस मुँह खुला रह गया। “अंदर आ… जल्दी।” मैंने उसे पिछली सीट पर खींच लिया। दरवाजा बंद। अँधेरा। सिर्फ सड़क की हल्की रोशनी।

जैसे ही वह बैठी, मैंने उसके मुँह पर हमला कर दिया। किसिंग… जंगली। होंठ काटना, जीभ चूसना, गर्दन चाटना। वह मेरे ऊपर चढ़ गई। नाइट ड्रेस ऊपर कर दी मैंने। ब्रा खोली एक झटके में। उसके स्तन दोनों हाथों में भर लिए। इतने नरम कि उंगलियाँ धँस गईं। निप्पल्स मुँह में लिए और जोर से चूसा। “आह्ह… राहुल… हल्का… आह्ह…” वह मेरे बाल नोच रही थी। मैंने एक निप्पल दाँतों से काटा हल्के से – वह चीख पड़ी पर लंड और जोर से दबाया अपने हाथ से। फिर मैं नीचे गया। नाइट ड्रेस पूरी उतार दी। काली पैंटी… बीच में गहरे रंग का गीला धब्बा। मैंने नाक लगाकर सूँघा। खुशबू… मीठी, खट्टी, जवानी की। “पूनम… तेरी चूत की खुशबू… पागल कर रही है।” वह शर्मा गई, पैर जोड़ लिए। मैंने पैर खोल दिए। पैंटी नीचे खींची। पहली बार उसकी नंगी चूत देखी। गुलाबी, चिकनी, बाल मुश्किल से। दो होंठ बंद, बीच में एक छोटी सी दरार। मैंने उंगली लगाई – पूरी गीली। उंगली अंदर जाते ही वह सिहर गई। “आह्ह… राहुल… अंदर मत… दर्द होगा…” मैंने धीरे-धीरे एक उंगली घुसाई। कितनी टाइट! उंगली भी मुश्किल से जा रही थी। अंदर की दीवारें धड़क रही थीं। मैंने उंगली अंदर-बाहर की, ऊपर क्लिट पर अंगूठा घुमाया। वह कराहने लगी – “उम्म्म… आह… राहुल… और… और जल्दी…” फिर मैंने जीभ लगा दी। उसकी वर्जिन चूत चाटी। मीठा-खट्टा पानी। वह मेरे सिर को दोनों टाँगों से जकड़ ली।

“राहुल… चाट… जोर से चाट… आह्ह्ह…” दस मिनट चाटा। उसकी चूत फूल गई, पानी बहने लगा। मैंने दो उंगलियाँ घुसाईं – अब आसानी से जा रही थीं। वह झटके मारने लगी। “मैं… मैं गिरने वाली हूँ… राहुल…” मैंने उंगलियाँ अंदर ही रखीं और क्लिट जोर से चूसा। वह चीख उठी – “आआआह्ह्ह… राहुल… मैं… मैं…” पूरा शरीर काँप गया। पहली बार उसकी चूत ने पानी छोड़ा। मेरे मुँह पर।

वह साँस फुला-फुला कर लेटी थी। मैंने अपना पैंट खोला। लंड बाहर निकला – सात इंच, मोटा, नसों वाला, टपकता हुआ। “देख… तेरी चूत के लिए तैयार।” उसने हाथ बढ़ाया। लंड पकड़ा… आँखें बड़ी। “इतना… मोटा… कैसे जाएगा राहुल…” “जाएगा जान… आज जाएगा।” मैंने उसे लिटाया। टाँगें फैलाईं। लंड का टोपा उसकी गीली चूत पर रखा। धीरे-धीरे रगड़ा। वह काँप रही थी। “राहुल… धीरे… प्लीज…” एक हल्का धक्का। सिर्फ टोपा अंदर। वह चीख पड़ी। “आह्ह्ह… दर्द… बहुत दर्द…” मैं रुका। किस करने लगा। स्तन दबाए। “बस थोड़ा… और थोड़ा…” दूसरा धक्का। आधा लंड अंदर। खून निकल आया। गर्म, चिपचिपा। वह रोने लगी। आँसू बह रहे थे। “निकाल… निकाल दे… बहुत फट गई…” मैंने लंड अंदर ही रखा। “नहीं जान… अब निकालूँगा तो और दर्द होगा। बस सह ले… अब मजा आएगा।” मैंने उसके कान में फुसफुसाया, “तेरी वर्जिन चूत… मेरी हो गई… अब मैं ही चोदूँगा इसे जिंदगी भर…” वह रो-रो कर बोली, “…ठीक है… कर… लेकिन धीरे…”

मैंने पूरा लंड एक जोर के झटके में घुसा दिया। पूरी सात इंच उसकी वर्जिन चूत में। वह जोर से चीखी। कार की सीट लाल हो गई। मैं रुका। अंदर धड़क रहा था उसका गर्भ। कितनी टाइट… जैसे लोहे की मुट्ठी लंड को मसल रही हो। मैंने किस किए, स्तन चूसे, क्लिट सहलाया। पाँच मिनट बाद वह शांत हुई। अब धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा। पहले धीरे… फिर थोड़ा तेज। दर्द कम होने लगा। “आह… आह… राहुल… अब… अब अच्छा लग रहा है…” मैंने स्पीड बढ़ाई। चप-चप-चप… खून और पानी की आवाज। वह अपनी गांड उठा-उठा कर मेरा साथ देने लगी। “जोर से… और जोर से चोद… मेरी चूत फाड़ दे…” दस मिनट बाद वह फिर झड़ गई। इस बार चीखकर। मैंने भी स्पीड पूरी कर दी। “पूनम… मैं… मैं छोड़ने वाला हूँ…” “अंदर… अंदर छोड़… मेरी चूत में…” मैंने पूरा पानी उसकी वर्जिन चूत के अंदर उड़ेल दिया। गर्म-गर्म। वह मेरे ऊपर चिपक गई। दोनों काँप रहे थे।

थोड़ी देर बाद मैं लेट गया। “अब तू ऊपर आ… अपनी वर्जिन चूत से मेरा लंड चूस।” वह शर्माते हुए ऊपर चढ़ी। लंड अपनी खून-पानी से भरी चूत पर बैठाया। धीरे-धीरे बैठी। पूरा अंदर। अब वह खुद उछलने लगी। स्तन उछल रहे थे। मैंने दोनों स्तन पकड़कर चूसे। “आह्ह… राहुल… मेरी चूत… कितनी भरी हुई है तेरे पानी से…” वह पंद्रह मिनट सवारी करती रही। दो बार और झड़ी। आखिर में मैंने फिर से उसकी चूत में पानी भरा।

सुबह चार बजे। कार की पिछली सीट पूरी लाल। हम दोनों नंगे, पसीने से तर, खून लगा। उसने मेरे सीने पर सिर रखा। “राहुल… आज से मैं तेरी हूँ… पूरी।” मैंने उसके माथे पर किस किया। “हाँ जान… तेरी ये फटी हुई चूत… अब सिर्फ मेरी।” वह धीरे-धीरे कपड़े पहनकर घर गई। चल नहीं पा रही थी। घर पहुँचकर कॉल किया – “राहुल… चूत बहुत जल रही है… लेकिन… बहुत मजा आया।” मैंने कार साफ की। खून के निशान मिटाए। घर आया तो लंड अभी भी खड़ा था। क्योंकि दिमाग में एक ही बात घूम रही थी – अगली बार… उसकी गांड।