जन्मदिन की रात - प्रिया की कुंवारी चूत तोड़ी

कार्तिक ने प्रिया को उसके 21वें जन्मदिन पर 5 स्टार होटल ले जाकर सरप्राइज दिया। पहले उसके नरम स्तन चूसते हुए, फिर गीली चूत चाटकर उसे पहली बार झड़वाया। धीरे-धीरे उसके टाइट चूत में मोटा लंड घुसाते ही प्रिया दर्द से चीखने लगी... लेकिन रात भर के कई राउंड्स में वो पागल हो गई। सुबह कार में भी चुदाई जारी रही। पूरी स्टोरी सुनो अब...

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Kartik

7/14/2026

नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम कार्तिक है। दिल्ली के दक्षिणी इलाके का रहने वाला। उम्र चौबीस साल। एक अच्छी IT कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हूँ। साल दो हजार सत्रह की बात है। मेरी जिंदगी में जब प्रिया आई तो सब कुछ बदल गया।

वो मेरे कॉलेज की ही थी, लेकिन अलग ब्रांच में। पहली मुलाकात फ्रेशर पार्टी में हुई थी। गोरी-चिट्टी, लंबी काली आँखें, घने बाल, पतली कमर और जो उसके स्तन थे, वे जैसे दो भारी, नरम और गोल फल। देखते ही लंड खड़ा हो जाता था। हम दोनों वर्जिन थे। सात महीने से डेटिंग कर रहे थे।

पहली किस पार्टी के बाद मेट्रो में हुई थी। अंधेरे कोने में, भीड़ के बीच। उसके होंठ काँप रहे थे। जीभ डालते ही उसने मेरी कमीज पकड़ ली। उसके बाद हमने पार्क में, कार में और उसके घर की छत पर कई बार किसिंग की। मैं उसके स्तनों को ब्लाउज के ऊपर से दबाता, वो कराहती। एक बार बारिश में भीगकर हम एक दुकान के पीछे गए। मैंने उसकी सलवार नीचे खींची और उसकी चूत चाटी। वो पहली बार झड़ी थी। मेरे बाल नोचते हुए चीखी थी। लेकिन लंड कभी अंदर नहीं डाला। वो दर्द से डरती थी।

मैं भी उसकी चूत की टाइटनेस सोचकर रोज मुठ मारता। कल्पना करता कि कब वो मेरे मोटे लंड को अपनी छोटी सी चूत में ले पाएगी।

उसका इक्कीसवाँ जन्मदिन आने वाला था। मैंने प्लान बनाया कुछ ऐसा जो उसे जिंदगी भर याद रहे। गुरुग्राम के एक पाँच सितारा होटल में एक रात का कमरा बुक किया। प्रिया को कहा कि दोस्त के घर रुकने का बहाना बना ले।

मैंने उसे एक सफेद लेस वाला ब्रा-पैंटी सेट और एक चेन गिफ्ट किया था।

जन्मदिन की शाम को मैं होटल के बाहर उसका इंतजार कर रहा था। वो आई तो देखता रह गया। ब्लैक वन-पीस ड्रेस में, बाल खुले, होंठ गुलाबी। अंदर वो सफेद लेस सेट पहने थी। हम कमरे में गए। कमरा खूबसूरत था – बड़ी बेड, डिम लाइट, बालकनी से शहर की रोशनी।

पहले हमने डिनर ऑर्डर किया। थोड़ी वाइन पी। बातें कीं। फिर लाइटें कम कर दीं।

मैंने उसे बेड पर लिटाया। धीरे-धीरे उसके कपड़े उतारे। ड्रेस ऊपर खींचा। उसके नंगे स्तन बाहर आए। सफेद लेस ब्रा में वे और भी सेक्सी लग रहे थे। मैंने ब्रा का हुक खोला। दोनों स्तन हाथों में किए। इतने नरम, इतने भारी। निप्पल्स को उंगलियों से घुमाया। वो साँस रोककर देख रही थी। फिर मैंने एक निप्पल मुंह में लिया। धीरे-धीरे चूसा। जीभ से चाटा। वो कराहने लगी। “कार्तिक… आह्ह…”

मैंने दूसरे स्तन को भी चूसा। दाँतों से हल्का खींचा। वो मेरे बालों में उंगलियाँ फेरने लगी। फिर मैं नीचे गया। पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत पर मुँह रखा। गर्माहट महसूस हुई। पैंटी गीली हो चुकी थी। मैंने पैंटी को दाँतों से नीचे खींचा। पहली बार उसकी पूरी नंगी चूत मेरे सामने थी – गुलाबी, चिकनी, थोड़े से बाल, दो छोटे होंठ बंद। बीच में एक महीन दरार।

मैंने नाक लगाकर सूँघा। उसकी खुशबू… मीठी, नम, जवानी भरी। फिर जीभ से चाटा। ऊपर से नीचे तक। क्लिट को चूसा। वो काँप गई। “आह्ह… कार्तिक… क्या कर रहे हो…” मैंने उसके पैर फैलाए और गहराई से चाटना शुरू किया। जीभ अंदर डाली। उसका स्वाद मीठा-खट्टा था। वो मेरे सिर को दोनों हाथों से दबा रही थी। “और… और चाटो… उmmmm…”

दस-पंद्रह मिनट चाटा। उसकी चूत फूल गई। पानी बहने लगा। मैंने दो उंगलियाँ धीरे से घुसाईं। टाइट थी, लेकिन गीली होने से आसानी से चली गईं। अंदर की दीवारें गर्म और नरम थीं। मैंने अंदर-बाहर करना शुरू किया और क्लिट को जीभ से चाटता रहा। वो झटके मारने लगी।

“कार्तिक… मैं… मैं… आआआह्ह्ह…” उसका शरीर अकड़ गया। पहली बार उसकी चूत ने जोर से पानी छोड़ा। मेरे मुंह पर छिड़क गया। वो साँस फूलते हुए लेटी रही।

अब मेरी बारी थी। मैंने कपड़े उतारे। लंड बाहर आया – आठ इंच लंबा, मोटा, नसें उभरी हुई, सिरा चमक रहा था। प्रिया ने पहली बार इतना करीब से देखा। आँखें बड़ी हो गईं। “इतना… बड़ा है…” मैंने उसके हाथ में दिया। “पकड़… हल्का सा हिला।” वो शर्माते हुए पकड़ने लगी। ऊपर-नीचे करने लगी। फिर मैंने कहा, “मुँह में ले… चूस।”

वो हिचकिचाई। मैंने उसके सिर को धीरे से आगे बढ़ाया। उसके होंठ मेरे लंड के सिरे को छूए। गर्म साँस लगी। फिर उसने धीरे से मुँह खोला। लंड का टोपा अंदर गया। गर्म, गीला मुंह। वो चूसने लगी। थोड़ा-थोड़ा। मैंने उसके बाल पकड़कर धीरे से आगे-पीछे किया। “हाँ… ऐसे ही… अच्छा लग रहा है जान…” वो गले तक लेने की कोशिश कर रही थी। आँखों से पानी आ रहा था। लेकिन वो रुकी नहीं।

फिर मैंने उसे 69 पोजीशन में लिटाया। उसके ऊपर चढ़ गया। उसकी चूत मेरे मुँह के सामने, मेरा लंड उसके मुँह के सामने। मैंने फिर चाटना शुरू किया। वो भी मेरे लंड को चूस रही थी। दोनों की साँसें तेज। कमरा उसकी चूत की खुशबू और हमारी साँसों से भरा था।

कुछ देर बाद मैंने उसे सीधा लिटाया। तकिए उसके कूल्हों के नीचे रखे। टाँगें फैलाईं। लंड का सिरा उसकी गीली चूत पर रखा। रगड़ने लगा। क्लिट पर घुमाया। वो काँप रही थी। “कार्तिक… अब… अब डालो… लेकिन धीरे…”

मैंने आँखों में आँखें डालकर कहा, “देखना… मैं तेरी चूत में जा रहा हूँ।” धीरे से धक्का मारा। टोपा अंदर गया। वो दाँत किटकिटाने लगी। “आह्ह… दर्द…” मैं रुका। उसके स्तन दबाए, निप्पल चूसे। “सह ले जान… अब बस थोड़ा…”

दूसरा धक्का। आधा लंड अंदर। उसकी चूत मेरे लंड को कस रही थी जैसे कोई गर्म मखमली दस्ताना। खून की बूँदें निकलीं। वो आँसू बहा रही थी। “दर्द… बहुत…” मैंने उसके होंठों पर किस किया। जीभ डाली। एक हाथ से क्लिट सहलाता रहा। पाँच मिनट बाद उसकी साँस सामान्य हुई।

अब मैंने धीरे-धीरे अंदर-बाहर करना शुरू किया। “चप… चप…” की हल्की आवाज। उसकी चूत गीली हो चुकी थी। दर्द कम हो रहा था। “आह… आह… कार्तिक… अब… अब अच्छा लग रहा है…” मैंने स्पीड बढ़ाई। पूरा लंड घुसा-घुसा कर मारा। उसकी चूत ने लंड को निगल लिया था। आँखें बंद करके वो चीख रही थी। “जोर से… जोर से चोदो… मेरी चूत फाड़ दो…”

मैंने उसकी टाँगें अपने कंधों पर रखीं और जोर-जोर से धक्के मारे। बेड हिल रहा था। “ले… ले… तेरी कुंवारी चूत अब मेरी हो गई… रोज चोदूँगा इसे…” वो पागल हो रही थी। “हाँ… हाँ… मैं तेरी हूँ… चोदो मुझे… आआआह्ह्ह…”

पंद्रह मिनट बाद वो जोर से झड़ी। चीखते हुए। उसकी चूत ने पानी की बौछार छोड़ी। मैं भी कंट्रोल नहीं कर पाया। “प्रिया… मैं छोड़ रहा हूँ… तेरी चूत में…” “अंदर… पूरा अंदर डाल दो…” मैंने जोर से अंतिम धक्का मारा और सारा गर्म माल उसकी गहराई में उड़ेल दिया। दोनों काँपते रहे।

थोड़ी देर आराम किया। लंड अभी भी उसकी चूत में था। फिर मैंने उसे ऊपर खींचा। “अब तू ऊपर आ।” वो मेरे ऊपर चढ़ी। लंड अपनी चूत में डाला। धीरे से बैठ गई। पूरा अंदर। अब वो उछलने लगी। स्तन उछल रहे थे। मैंने दोनों हाथों से पकड़कर चूसे। “आह्ह… कार्तिक… तेरे लंड से मेरी चूत भर गई है…” वो पंद्रह मिनट तक सवारी करती रही। दो बार और झड़ी। आखिर में मैंने फिर से उसकी चूत में माल भरा।

रात के तीन बजे थे। हम नंगे लेटे थे। पसीने से तर। मैंने कहा, “अब एक और राउंड।” इस बार मैंने उसे कुत्ते वाली पोजीशन में करवाया। वो घुटनों के बल। गांड ऊपर। मैंने पीछे से लंड घुसाया। जोर-जोर से मारने लगा। “चपचपचप…” की आवाज पूरे कमरे में गूँज रही थी। वो चादर काट रही थी। “कार्तिक… और जोर से… मेरी चूत फट रही है… मजा आ रहा है…” मैंने उसके बाल पकड़कर खींचे और जोर से चोदा। वो चीख-चीख कर झड़ गई।

सुबह छह बजे फिर से किया। इस बार शावर में। गर्म पानी के नीचे। वो दीवार से सटी हुई। मैंने पीछे से लंड डाला। एक हाथ से उसके स्तन दबा रहा था, दूसरे से क्लिट। वो बार-बार झड़ रही थी। “कार्तिक… मैं तेरी रंडी बन गई हूँ… अब कभी छोड़ना मत…”

सुबह नौ बजे हम चेकआउट करके कार में बैठे। होटल से निकलते ही प्रिया मेरे कंधे पर सिर रखकर बोली, “कार्तिक… अभी भी मन नहीं भर रहा… थोड़ा और…”

मैंने कार साइड में खींच ली। एक सुनसान जगह पर, उसके कॉलोनी के पास ही। अंदर से लॉक किया। “आजा… अभी और चोदता हूँ तुझे।”

वो पिछली सीट पर मुड़ी। मैंने उसकी ड्रेस ऊपर खींची। पैंटी एक तरफ खिसकाई। लंड अभी भी खड़ा था। मैंने पीछे से एक जोर का धक्का मारा। “आह्ह… कार्तिक… अभी भी इतना hard…” उसकी चूत अभी भी गीली और फूली हुई थी। मैंने जोर-जोर से मारना शुरू किया। कार हिल रही थी। “चपचपचप…” की आवाज आ रही थी। वो आगे झुककर सीट पकड़कर चीख रही थी। “जोर से… और जोर से… मेरी चूत अभी भी प्यासी है…”

मैंने उसके बाल पकड़कर खींचे और जोर से चोदा। दस मिनट बाद वो फिर झड़ गई। मैंने भी आखिरी बार उसकी चूत में माल उड़ेल दिया।

फिर मैंने उसे उसके घर के पास छोड़ा। वो चलते-चलते मुड़ी और बोली, “घर पहुँचकर कॉल करूँगी…”

घर पहुँचकर उसने कॉल किया। आवाज में अभी भी साँस फूली हुई थी। “कार्तिक… चूत में अभी भी तेरा माल भरा हुआ है… जल रही है… लेकिन बहुत मजा आया। अगली बार और देर तक चोदना… और… अगली बार मेरी गांड में भी डालना।”

मैंने हँसकर कहा, “तैयार रहना जान… अगली बार तेरी गांड फाड़ दूंगा।”