प्लंबर ने मेरी चूत की प्यास बुझा दी

कोमल 28 साल की शादीशुदा औरत थी। पति रोज उसे चोदते थे, लेकिन वह कभी संतुष्ट नहीं होती थी। एक दिन नल खराब हो गया और एक हैंडसम प्लंबर आ गया। उसने नल ठीक करने के बहाने कोमल की चूत को इतना चाटा और चोदा कि वह पहली बार चीख-चीखकर झड़ गई। रोमांटिक फोरप्ले, जोरदार चुदाई और अनकही सिसकारियाँ… पूरी कहानी पढ़कर तुम भी गर्म हो जाओगे।

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Komal

7/5/2026

मेरा नाम कोमल है। मुंबई की रहने वाली हूँ। उम्र अट्ठाईस साल। शादी को तीन साल हो चुके हैं। पति प्राइवेट कंपनी में जॉब करते हैं। हर रात वे मुझे चोदते हैं, लेकिन उनकी लंड मेरी चूत की असली भूख कभी नहीं मिटा पाती। सेक्स खत्म होने के बाद भी मेरे अंदर एक खालीपन रहता है। मैं प्यासी, अधूरी और बेचैन सो जाती हूँ।

मुझे एक ऐसे मर्द की तलाश थी जो मेरे शरीर को सिर्फ इस्तेमाल न करे, बल्कि उसे महसूस करे, चूमे और धीरे-धीरे मेरी चूत को इतना भरे कि मैं चीखकर झड़ जाऊँ।

वो दिन मुंबई की हल्की बारिश के बाद का था। नमी भरी हवा घर में घुस रही थी। अचानक किचन का मुख्य नल फट गया। पानी फर्श पर फैलने लगा। मैंने घबराकर पति को फोन किया। उन्होंने एक प्लंबर भेजने को कहा।

आधे घंटे बाद दरवाजे की घंटी बजी।

मैंने दरवाजा खोला। सामने खड़ा था रमेश। लंबा, चौड़े कंधे और मांसल शरीर। उसकी शर्ट पसीने और बारिश से भीगी हुई थी, जो उसकी तनी हुई छाती से चिपकी हुई थी। उसने मुझे एक बार ऊपर से नीचे तक देखा।

“नल खराब है?” उसकी आवाज गहरी थी।

“हाँ… पानी फैल रहा है,” मैंने कहा।

मैंने उसे अंदर आने दिया। फर्श पर पानी की पतली परत थी। मेरी साड़ी का निचला हिस्सा भीग चुका था। रमेश ने टूल बॉक्स रखा और झुककर नल देखने लगा। उसकी पीठ की मसल्स साफ दिख रही थीं। मेरी चूत अचानक गर्म हो गई।

मैं किचन गई और चाय बनाई। जब वापस आई तो उसने नल का ऊपरी हिस्सा खोल लिया था। पानी की बूँदें उसके माथे पर टपक रही थीं। मैंने कप आगे बढ़ाया।

“चाय पी लो… थक गए होगे।”

उसने कप लिया। उसकी उँगलियाँ मेरी उँगलियों से छू गईं। कुछ सेकंड हम चुप रहे।

“तुम्हारे पति घर पर नहीं हैं?” उसने सीधा सवाल किया।

“नहीं… ऑफिस गए हैं।”

“और तुम अकेली हो?”

मैंने सिर हिलाया। फिर धीरे से बोली, “पति रोज चोदते हैं… लेकिन कभी संतुष्ट नहीं कर पाते। मैं हर बार प्यासी रह जाती हूँ।”

रमेश ने कप नीचे रखा। उसकी आँखें मेरी आँखों में घुस गईं।

“अगर तुम चाहो तो… मैं तुम्हें वो सब दे सकता हूँ जो तुम्हें चाहिए।”

मैंने जवाब नहीं दिया। बस उसके पास बढ़ गई। उसने मेरे गीले बालों को पीछे किया और बहुत धीरे से मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए।

पहला किस नम और नरम था। फिर वह गहरा हो गया। उसकी जीभ ने मेरे मुंह के अंदर प्रवेश किया। हम दोनों एक-दूसरे की साँस ले रहे थे।

“उम्म्म्म…” मेरे गले से पहली सिसकारी निकली।

रमेश ने मुझे गोद में उठा लिया। मेरी भीगी साड़ी उसके कपड़ों से चिपक रही थी। वह मुझे बेडरूम तक ले गया और बेड पर बहुत सावधानी से लिटा दिया।

उसने मेरे पैरों से गीली सैंडल उतारी और मेरे गीले पैरों को अपने हाथों में लिया। फिर उसने मेरे पैर के अंगूठे को चूम लिया। “आह्ह्ह…” मेरे मुंह से आवाज निकली।

उसने मेरी साड़ी का पल्लू धीरे से खींचा। फिर ब्लाउज के हुक खोलते हुए हर बार मेरी त्वचा को चूमता गया। जब ब्लाउज उतरा तो उसने मेरी काली ब्रा को उतारने से पहले मेरे स्तनों को ब्रा के ऊपर से चूमा। फिर ब्रा उतारी।

मेरे स्तन बाहर आए — भारी और तने हुए। रमेश ने उन्हें दोनों हाथों में लिया और धीरे से मसलते हुए बोला, “कितने सुंदर और भरे हुए हैं…”

उसने एक निप्पल मुंह में लिया और बहुत धीरे से चूसने लगा। जीभ से घुमाता रहा। “आह्ह्ह्ह… रमेश…” मैं कराह उठी। वह बारी-बारी से दोनों स्तनों को चूस रहा था। कभी हल्के से काटता, कभी जोर से चूसता। मेरी सिसकारियाँ बढ़ रही थीं।

फिर वह नीचे उतरा। मेरे पेट पर लंबे किस किए। नाभि में जीभ डालकर चूसने लगा। मेरी साड़ी और पेटीकोट को ऊपर खिसकाते हुए उसने मेरी चड्डी उतार दी।

मेरी चूत पूरी तरह गीली और फूली हुई थी। रमेश ने पहले मेरी जांघों के अंदरूनी हिस्से को चूमना शुरू किया — बाएँ, दाएँ, धीरे-धीरे ऊपर की तरफ। मैं तड़प रही थी।

आखिरकार उसने अपनी गर्म जीभ मेरी चूत पर रखी। पहले तो सिर्फ एक लंबा, धीमा चाटा। फिर क्लिटोरिस पर जीभ से दबाव डाला। “आह्हhhhh… ओह्ह्ह…” मैं जोर से सिसकारी मार उठी।

वह धीरे-धीरे चाट रहा था। कभी जीभ को अंदर घुसा देता, कभी बाहर निकालकर मेरी चूत के होठों को चूमता। दो उँगलियाँ भी अंदर डाल दीं और धीरे-धीरे रगड़ने लगा। “उम्म्म्म… रमेश… तुम्हारी जीभ… आह्ह्ह… मुझे पागल कर रही है…”

मेरा पहला ऑर्गेज्म आ गया। मैं काँपने लगी। मेरी चूत ने उसके मुंह पर रस छोड़ दिया। लेकिन वह रुका नहीं। वह और धीरे, और प्यार से चाटता रहा। मैं दोबारा झड़ गई।

अब मैंने उसे ऊपर खींचा। “अब मैं तुम्हें चूसूंगी…”

रमेश ने अपनी शर्ट और पैंट उतार दी। जब चड्डी उतारी तो उसका मोटा, काला, नौ इंच का लंड सामने आ गया — नसों से भरा और सिरा चमकदार। मैं घुटनों के बल बैठ गई।

मैंने पहले उसके लंड के सिरे पर हल्का सा किस किया। फिर जीभ से एक लंबा चाटा। “हम्म्म…” रमेश की छाती से गहरी आवाज निकली।

मैंने उसका लंड मुंह में लिया और धीरे-धीरे चूसने लगी। ऊपर-नीचे करती रही। वह मेरे बालों में उँगलियाँ फेर रहा था। “कोमल… तुम्हारा मुंह कितना गर्म है… आह्ह्ह…”

कुछ देर बाद उसने मुझे बेड पर लिटाया। मेरी टाँगें अपने कंधों पर रखीं और अपना लंड मेरी चूत के मुंह पर रखा। उसने मेरी आँखों में देखते हुए धीरे से दबाव डाला।

“आह्ह्ह्ह…” सिरा अंदर घुसते ही मैं चीख पड़ी। दर्द था, लेकिन साथ ही गहरा आनंद भी। वह रुका रहा। फिर बहुत धीरे-धीरे आगे बढ़ा। उसका पूरा लंड अंदर घुसते ही मैं सिसकारियाँ मारने लगी। “आह्ह्ह… रमेश… तुम्हारा लंड… मेरी चूत को फाड़ रहा है… उम्म्म्म…”

वह धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा। हर धक्के के साथ वह मेरे होंठों पर किस करता। “तुम कितनी खूबसूरत लग रही हो…” वह फुसफुसाया।

धीरे-धीरे उसकी रफ्तार बढ़ी। अब वह जोर-जोर से चोद रहा था। बेड हिल रहा था। मेरे स्तन उछल रहे थे। मैं उसके कूल्हों को पकड़कर और अंदर खींच रही थी। “और जोर से… आह्ह्ह्ह… रमेश… मेरी चूत को फाड़ दो… आहhhhh…”

वह मुझे पलटकर डॉगी स्टाइल में ले आया। मेरे बाल पकड़कर पीछे खींचे और जोरदार ठोके लगाने लगा। “ले… ले… मेरी जान… आहhh…”

मैं चीख-चीखकर चिल्ला रही थी। “हाँ… और जोर… मैं झड़ने वाली हूँ… आहhhhhह्ह…”

तीसरा ऑर्गेज्म आ गया। मेरी चूत ने उसके लंड को कस लिया। रमेश भी रुक नहीं पाया। उसने मुझे वापस लिटाया, मेरी टाँगें चौड़ी कीं और आखिरी जोरदार धक्के लगाए।

“कोमल… मैं भी… आह्ह्ह…”

उसने जोर से धक्का मारा और अपना गर्म वीर्य मेरी चूत के अंदर भर दिया। मैंने महसूस किया कि उसका लंड फड़क रहा है और अंदर गर्म तरल भर रहा है। मैं भी चौथी बार झड़ गई। पूरा शरीर सुन्न हो गया था।

कुछ देर हम दोनों चुपचाप एक-दूसरे से चिपके रहे। बाहर नल से अब भी पानी की बूँदें टपक रही थीं। रमेश ने मेरे माथे पर, आँखों पर और होंठों पर कोमल किस किए। “तुम सच में बहुत खास हो…” वह धीरे से बोला।

उसने जल्दी से नल ठीक कर दिया। काम खत्म करते समय उसने कहा, “अगर फिर कभी नल खराब हो… या तुम्हें मेरी जरूरत हो… तो बुला लेना। मैं आ जाऊँगा।”

मैंने उसे डबल पैसे दिए और अपना नंबर भी। “हर हफ्ते आना… प्लीज…”

वह चला गया।

मैं बाथरूम में गई। मेरी चूत से अभी भी उसका गर्म वीर्य टपक रहा था। शीशे में अपना चेहरा देखा — लाल, होंठ सूजे हुए, शरीर पर उसके प्यार के निशान। पहली बार तीन साल बाद मैं सच में संतुष्ट, खूबसूरत और जीवित महसूस कर रही थी।

रात को जब पति आए और मुझे चोदने लगे, तो मैंने आँखें बंद कर लीं। मन में रमेश का मोटा लंड, उसकी सिसकारियाँ और उसके कोमल किस घूम रहे थे। और जब मैं झड़ी तो उसकी आवाज मेरे कानों में गूँज रही थी — “तुम कितनी खूबसूरत लग रही हो…”

अब मुझे पता चल गया था कि मेरी प्यास सिर्फ लंड से नहीं बुझती।

वो बुझती है किसी के प्यार भरे, धीमे और जोरदार चोदने से।

और रमेश… वो हर हफ्ते आने वाला था।