झुग्गी के गंदे गद्दे पर रात भर चली तीन मोटे लंडों की बेरहम चोदाई

सड़क पर पहली बार चुदाई के बाद रामू, श्याम और बाबू ने मीरा को अपनी झुग्गी में ले गए। पुराने गद्दे पर लिटाकर बाबू ने पहली बार उसकी चूत चाटी और मीरा चीखते हुए झड़ गई। फिर रामू ने मोटा लंड उसकी तंग चूत में घुसाया और “ओह्ह… मोटा लंड… चोदो मुझे!” चिल्लाती रही मीरा। कुत्ते वाली पोजीशन में गांड पकड़कर जोर-जोर से धक्के, ऊपर-नीचे सवारी, एक के लंड पर बैठकर दूसरा मुंह में लेना… रात के तीन बजे तक चली वो जंगली चोदाई। सुनो कैसे मीरा ने कई बार ऑर्गेज्म लिया और स्क्वर्ट भी किया।

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Meera

7/12/2026

मेरा नाम मीरा है। उम्र २८ साल। शादी को पाँच साल हो चुके हैं। पति अशोक एक छोटी फैक्ट्री में सुपरवाइजर हैं। दिन भर की मेहनत के बाद घर आते हैं तो खाना खाकर सीधे सो जाते हैं। चुदाई बस नाम की। उनका लंड सिर्फ चार इंच का पतला सा है और वे दो-तीन मिनट में ही झड़ जाते हैं। मैं हर रात अधूरी, प्यासी और गीली चूत लेकर सोती हूँ। उंगलियों से रगड़ती हूँ, कभी-कभी ककड़ी या केला भी अंदर डाल लेती हूँ, लेकिन असली मोटे, गर्म और जोरदार लंड की भूख मुझे अंदर से खा रही थी।

वह शाम मैं अपनी सहेली के घर से लौट रही थी। लाल रंग की साड़ी पहनी हुई थी जो मेरे गोरे शरीर पर बहुत अच्छी लग रही थी। ब्लाउज थोड़ा कम था जिससे मेरे ३६ इंच के बड़े-बड़े बोबों की गहरी दरार साफ दिख रही थी। पेटीकोट में मेरी गोल-गोल मोटी गांड हिल रही थी। रास्ता छोटा करने के लिए मैंने एक अधबनी सड़क का रास्ता लिया। वहाँ निर्माण का काम चल रहा था, इसलिए कम ही गाड़ियाँ आती थीं। अंधेरा बढ़ रहा था।

अचानक सड़क के किनारे तीन मजदूर बैठे दिखे। पुराने फटे जॉगर्स, गंदी टी-शर्ट, पसीने से तर बदन। एक के हाथ में सस्ती शराब की बोतल थी। वे शायद ठेकेदार के पैसे न मिलने पर गुस्सा कर रहे थे। जब मैं उनके पास से गुजरी तो तीनों की नजरें मेरे उभरे हुए स्तनों पर अटक गईं। मैंने भी देखा कि उनके जॉगर्स में लंड खड़ा हो रहा था। मेरी चूत अचानक भीगने लगी। पति की कमी से मेरा शरीर आजकल आग की तरह जलता रहता था।

मैंने कदम रोक लिए। “अरे भाइयो, इतनी रात गए यहाँ क्या बैठे हो? कोई दिक्कत है क्या?”

उनमें से सबसे आगे वाला रामू बोला, “बहनजी, ठेकेदार ने तीन दिन से पैसे नहीं दिए। घर में बच्चे भूखे हैं।”

मैंने अपनी निचली होंठ दाँतों से काटते हुए कहा, “क्या मैं तुम लोगों की इस समस्या को हल करने में मदद करूँ?”

तीनों ने एक-दूसरे को देखा। श्याम मुस्कुराते हुए बोला, “तुम क्या मदद करोगी दीदी? हम तो गरीब मजदूर हैं।”

मैंने कोई जवाब नहीं दिया। बस उनके पास खड़ी हो गई और धीरे से मुस्कुरा दी।

रामू ने सबसे पहले साहस किया। उसने हाथ बढ़ाया और मेरे बाएँ बोबे को जोर से दबा लिया। मैं काँपी लेकिन नहीं हटी। श्याम ने मेरे दाएँ बोबे पर हाथ रख दिया और निप्पल को उँगलियों से मसलने लगा। बाबू मेरे सामने घुटनों के बल बैठ गया और मेरी साड़ी को ऊपर उठाकर मेरी नाभि पर मुंह लगा दिया। उसने साड़ी के पतले कपड़े के ऊपर से ही मेरी नाभि चूसना शुरू कर दिया। उसकी गर्म, गीली जीभ कपड़े को भिगो रही थी। मुझे बहुत शर्म आ रही थी। सड़क पर, कोई भी आ सकता था। लेकिन मेरी चूत से पानी बहने लगा था। मैंने आँखें बंद कर लीं और उनके हाथों को अपने शरीर पर घूमने दिया।

वे और बेखौफ हो गए। रामू ने मेरी साड़ी की पिन खोली और एक झटके में साड़ी खींच ली। श्याम ने पेटीकोट की डोरी खींच दी। बाबू ने ब्लाउज के हुक खोले। कुछ ही पलों में मेरी साड़ी, पेटीकोट और ब्लाउज सड़क पर बिखर गए। मैं सिर्फ ब्रा और पैंटी में खड़ी थी। फिर ब्रा का हुक खोला गया। मेरे बड़े-बड़े गोरे स्तन बाहर आ गए। निप्पल हवा में खड़े हो गए। बाबू ने पैंटी को एक झटके में फाड़ दिया। अब मैं पूरी तरह नंगी थी सड़क के बीच में।

मेरे शरीर पर ठंडी हवा लग रही थी। मेरी चूत साफ दिख रही थी और उसमें से चमकता पानी जाँघों पर बह रहा था। शर्म से मेरा चेहरा लाल हो गया था, लेकिन साथ ही एक अजीब सा नशा भी चढ़ रहा था।

दूर से एक ट्रक गुजरा। ड्राइवर ने ब्रेक मारी और हमें देखता रहा। मैंने कुछ नहीं किया। दो युवक बाइक पर रुक गए और आँखें फाड़कर देखने लगे।

मैं खुद बिना बोले घुटनों के बल बैठ गई। उनके तीनों जॉगर्स खींचकर नीचे उतार दिए। उनके लंड एक साथ बाहर आ गए। तीनों काले, मोटे, नसों से भरे हुए, कम से कम साढ़े छह इंच लंबे और बहुत मोटे। लेकिन सबसे बुरी बात उनकी बदबू थी। पेशाब की तेज बदबू, पसीने की बदबू और सड़ी हुई मछली या सड़े मांस जैसी महक। मुझे उबकाई आ गई। लेकिन मेरी चूत ने और जोर से पानी छोड़ा।

मैंने सबसे पहले रामू के लंड को हाथ में लिया। वह गर्म था और भारी। मैंने नाक पास लाकर सूंघा। बदबू से मेरा सिर चकरा गया। फिर भी मैंने जीभ निकाली और उसके लंड के सिर पर चाटा। स्वाद कड़वा, नमकीन और सड़ा हुआ। लेकिन मैंने मुंह खोला और उसे अंदर ले लिया।

“आह्ह…” मैंने चूसना शुरू किया। सिर आगे-पीछे किया। लंड मोटा था इसलिए मेरे मुंह को पूरी तरह भर रहा था। गले तक लेने की कोशिश की तो गला बंद हो गया और आँसू आ गए।

श्याम ने मेरे बाल पकड़ लिए और अपने लंड को मेरे मुंह में ठोकना शुरू कर दिया। “चूस ले रंडी! गले तक ले!” वह गाली देते हुए चिल्लाया।

मैं घुट रही थी, लार मेरे मुंह से बह रही थी और उनके लंड पर लग रही थी, लेकिन रुकी नहीं। बाबू ने मेरा एक हाथ पकड़कर अपने लंड पर रख दिया। मैं उसे भी तेजी से हिला रही थी।

वे बारी-बारी से मेरे मुंह में लंड डालते। एक गले तक ठोकता तो दूसरा मेरे बोबों पर थप्पड़ मारता। तीसरा मेरी निप्पल चूसता और काटता। फिर उन्होंने मुझे टी-बैगिंग करवाई। रामू ने अपनी गेंदें मेरे मुंह में डाल दीं। बालों वाली, पसीने से तर और बदबूदार गेंदें। मैंने उन्हें चूसा। बदबू से मुझे घिन आ रही थी लेकिन मैं उनकी कुतिया बन चुकी थी।

लगभग पंद्रह मिनट तक यह सिलसिला चला। मेरे मुंह, गले और चेहरे पर लार और प्री-कम की गंदगी लगी हुई थी।

अचानक रामू बोला, “अब माल निकालते हैं साली!”

उसने मेरे सिर को पकड़कर लंड गले तक घुसा दिया और जोर से झड़ गया। गर्म-गर्म मोटा वीर्य मेरे गले में उतरने लगा। मैंने निगल लिया। फिर श्याम ने बाहर निकाला और मेरे चेहरे पर छिड़क दिया। माल मेरी आँखों पर, नाक पर, होठों पर और बालों में गिरा। बाबू ने भी यही किया। तीनों का माल मेरे चेहरे को पूरी तरह ढक चुका था। आँखें खुल नहीं रही थीं। मैं अंधी सी हो गई थी।

मैंने उँगलियों से माल इकट्ठा किया और मुंह में डालकर चाट लिया। सब कुछ निगल लिया। जैसे एक अच्छी रंडी की तरह।

इतने में सड़क पर दो और बाइक रुक गई थीं। चार-पाँच युवक खड़े होकर देख रहे थे। उनमें से दो ने फोन निकाल लिया और वीडियो रिकॉर्ड करने लगे। मुझे देखकर शर्म आनी चाहिए थी। लेकिन इसके बजाय मेरी चूत और ज्यादा गीली हो गई। मैंने अपनी टाँगें थोड़ी फैलाईं ताकि वे मेरी चमकती हुई चूत देख सकें। एक्जीबिशनिज्म का कीड़ा मुझे काट चुका था।

रामू, श्याम और बाबू थक चुके थे। उनके लंड ढीले पड़ गए थे।

रामू ने कहा, “चल हमारे साथ बहनजी। अभी रात पूरी नहीं हुई है।”

मैंने साड़ी उठाई और बिना अंदर कुछ पहने ही उसे पहन लिया। पेटीकोट और ब्लाउज सड़क पर ही छोड़ दिए। वे मुझे अपने साथ ले गए। पास ही एक छोटी सी झुग्गी थी जहाँ तीनों रहते थे।

अंदर अंधेरा था। एक पुराना गद्दा फर्श पर पड़ा था। बदबू थी लेकिन अब मुझे वह बदबू अच्छी लग रही थी।

उन्होंने मुझे गद्दे पर लिटा दिया। बाबू ने मेरी टाँगें फैलाईं और अपनी जीभ मेरी चूत पर लगा दी। वह चाटने लगा। पहली बार किसी ने मेरी चूत चाटी थी। पति ने कभी नहीं किया। दो-तीन मिनट में ही मेरा शरीर काँप उठा और मैं झड़ गई। “आआआ…!” मैं चीख उठी।

फिर रामू ने अपना लंड मेरी चूत पर रखा और एक जोरदार धक्का मारा। मोटा लंड मेरी तंग चूत में घुस गया। दर्द हुआ लेकिन फिर मजा आने लगा। “ओह्ह… मोटा लंड… चोदो मुझे!” मैं चिल्लाई।

वे बारी-बारी से चोदते रहे। एक मेरी चूत में लंड घुसाए हुए धक्के मारता तो दूसरा मेरे मुंह में लंड डाल देता। तीसरा मेरे बोबों को मसलता और निप्पल काटता। चाप-चाप, चूसने और थप्पड़ मारने की आवाजें पूरे कमरे में गूँज रही थीं।

मैंने कई बार ऑर्गेज्म लिया। एक बार तो मेरी चूत से पानी की फुहार छूट गई। वे हँसते हुए बोले, “साली रंडी तो स्क्वर्ट भी करती है!”

रात के तीन बजे तक उन्होंने मुझे अलग-अलग पोजीशन में चोदा। कुत्ते वाली पोजीशन में मेरी गांड पकड़कर जोर-जोर से धक्के मारे। मैं उनकी सवारी करती हुई ऊपर-नीचे हुई। एक के लंड पर बैठकर दूसरा मुंह में लेती रही। हर बार उन्होंने मेरी चूत में या मुंह में अपना गर्म माल छोड़ा।

सुबह पाँच बजे जब मैं घर पहुँची तो पति अभी भी सो रहा था। मैं चुपचाप बाथरूम गई। पूरे शरीर पर उनका माल, पसीना और बदबू लगी हुई थी। मैंने नहाया लेकिन मन में अभी भी तीनों के गंदे लंड का स्वाद था।

यह मेरी पहली सार्वजनिक चुदाई और एक्जीबिशनिस्ट अनुभव था। और मुझे मालूम था कि यह सिर्फ शुरुआत थी।