परीक्षा खत्म हुई... और रात भर चुदाई चली

12वीं की आखिरी परीक्षा खत्म हुई थी। घर खाली था। बारिश हो रही थी। अर्जुन आया। पहले तो उसने मेरे बूब्स दबाए... फिर मेरी चूत चाटी... फिर मैंने उसका लंड मुंह में लिया। लेकिन असली खेल तो तब शुरू हुआ जब उसने मुझे कुत्ते वाली पोजीशन में घुमा दिया। उसने मेरी गांड में अपना मोटा लंड घुसाया... और जोर-जोर से मारने लगा। मैं रो रही थी... चीख रही थी... लेकिन रुकने का नाम नहीं ले रही थी। पढ़ो पूरी कहानी और जानो कि उस बारिश वाली रात में कितनी बार मैं झड़ी।

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Riya

6/28/2026

में रिया हूँ। अठारह साल की। आज सुबह 12वीं की आखिरी परीक्षा खत्म हुई थी। घर पर मैं अकेली थी। मम्मी-पापा दो दिन के लिए नानी के घर चले गए थे।

शाम हो चुकी थी। बाहर जोरों से बारिश हो रही थी। मैं बिस्तर पर लेटी हुई थी। सफेद पतले नाइट सूट में। मेरे बड़े-बड़े बूब्स हल्के-हल्के ऊपर-नीचे हो रहे थे। निप्पल कपड़े से रगड़ खा रहे थे। मैंने हाथ उठाकर अपने बूब्स को दबाया। छूते ही मेरी चूत में गर्माहट फैल गई।

उसी समय फोन पर मैसेज आया — अर्जुन।

“रिया… मैं बोर हो रहा हूँ। बारिश में मन नहीं लग रहा। क्या मैं तुम्हारे घर आ जाऊँ?”

मैंने जवाब दिया — “आ जा… मैं भी अकेली हूँ।”

वो तुरंत आ रहा था।

मैं उठकर नहाने चली गई। नहाते समय मैंने अपने बूब्स को अच्छे से सहलाया और नीचे दो उँगलियाँ अपनी चूत में डालकर धीरे-धीरे हिलाईं।

नहाने के बाद मैंने एक बहुत पतला नीला नाइट सूट पहना। कपड़ा इतना पतला था कि मेरे बूब्स का आकार साफ दिख रहा था।

दरवाजे की घंटी बजी।

अर्जुन बारिश में भीगा हुआ खड़ा था। उसने मुझे देखा और मुस्कुराया।

“रिया… तू आज बहुत सेक्सी लग रही है।”

हम सोफे पर बैठ गए। बातें कम होती गईं। अर्जुन ने मुझे अपनी तरफ खींचा और मेरे होंठों पर किस किया। धीरे-धीरे किस गहरा होता गया। उसकी जीभ मेरे मुंह में घुस गई। हम दोनों एक-दूसरे की जीभ चूस रहे थे।

उसके हाथ मेरे बूब्स पर आ गए। उसने कपड़े के ऊपर से जोर से दबाया। फिर मेरे नाइट सूट के बटन खोलने लगे। जब आखिरी बटन खुला तो मेरे बड़े-बड़े बूब्स बाहर आ गए। अर्जुन ने दोनों हाथों से उन्हें पकड़ लिया और जोर से मसलने लगा। फिर उसने एक निप्पल को अपने मुंह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगा। जीभ से घुमा रहा था, कभी हल्का काट रहा था।

“अर्जुन… और जोर से चूस… आह्ह्ह…” मैं उसके बालों में उँगलियाँ फँसा चुकी थी।

उसने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया और मेरा नाइट सूट पूरी तरह उतार दिया। अब मैं उसके सामने पूरी तरह नंगी थी।

उसने मेरी टाँगें फैलाईं और अपना सिर मेरी चूत के बीच ले आया। पहले तो सिर्फ गर्म साँसें मारता रहा, फिर जीभ से मेरी चूत चाटनी शुरू कर दी। ऊपर-नीचे, गोल-गोल। कभी चूसता, कभी जीभ अंदर डालकर घुमाता। मैं उसके सिर को अपनी चूत में दबा रही थी।

“अर्जुन… मेरी चूत चूस… आह्ह्ह… मैं झड़ने वाली हूँ…”

कुछ देर बाद मैं उसके मुंह पर ही जोर से झड़ गई। मेरा पूरा शरीर काँप रहा था।

जब मैं शांत हुई तो उसने अपना शर्ट और पैंट उतार दिया।

उसका लंड खड़ा हो चुका था — मोटा, सख्त, नसों से भरा हुआ और ऊपर से चमक रहा था। सिरा थोड़ा लाल हो रहा था। मैंने हाथ बढ़ाकर उसे छुआ। गरम-गरम था। मैंने धीरे से उसे सहलाया। मेरी उँगलियाँ उसके लंड की नसों पर घूम रही थीं।

“रिया… इसे मुंह में ले ले…” उसने कहा।

मैंने घुटनों के बल बैठकर उसका लंड अपने मुंह में लिया। पहले सिरे को चूसा, फिर धीरे-धीरे अंदर लिया। वो मेरे बालों में हाथ फेर रहा था।

“बहुत अच्छा लग रहा है रिया…” वो सिसकार रहा था।

थोड़ी देर बाद उसने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया। मैंने खुद अपनी टाँगें फैला दीं। उसने अपना मोटा लंड मेरी गीली चूत पर रखा और धीरे-धीरे दबाना शुरू किया।

पहला इंच अंदर गया… फिर दूसरा… फिर पूरा मोटा लंड मेरी चूत के अंदर चला गया। मेरी चूत की दीवारें उसे कस रही थीं।

“आह्ह्ह… अर्जुन… तेरा लंड कितना मोटा है… मेरी चूत फट रही है…” मैं चीख पड़ी।

वो धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा। हर धक्के के साथ मेरा शरीर हिल रहा था। मेरे बूब्स ऊपर-नीचे हो रहे थे। वो मेरे बूब्स को जोर से दबा रहा था।

“रिया… तेरी चूत कितनी टाइट है… आह्ह…”

मैं और तेज हो गई। “जोर से चोद… मुझे और जोर से चोद…”

उसने मुझे पीठ के बल लिटा दिया, मेरी टाँगें अपने कंधों पर रखीं और जोर-जोर से धक्के मारने लगा। उसका मोटा लंड मेरी चूत के सबसे गहरे हिस्से को बार-बार छू रहा था।

“अर्जुन… मैं झड़ने वाली हूँ… आह्ह्ह्ह!”

मैं जोर से झड़ गई। मेरी चूत बार-बार सिकुड़ रही थी।

जब मैं शांत हुई तो उसने अपना लंड मेरी चूत से निकाला। वो अभी भी खड़ा था। उसने मेरी कमर पकड़ ली और मुझे घुमा दिया — अब मैं कुत्ते वाली पोजीशन में थी।

उसने मेरी गांड के दोनों हिस्सों को हाथों से फैलाया। फिर अपनी उँगली से मेरी गांड के छेद को छुआ।

“रिया… तेरी गांड भी बहुत सुंदर है…” उसने फुसफुसाया।

मैंने कुछ नहीं कहा, बस सिर नीचे झुकाए रखा। वो मेरी गांड के छेद पर थूक लगाकर अपनी उँगली अंदर डालने लगा। पहले एक, फिर दो उँगलियाँ। मैं काँप रही थी।

थोड़ी देर बाद उसने अपना मोटा लंड मेरी गांड पर रखा।

“रिया… गांड में लूंगा… ठीक है ना?” उसने पूछा।

मैंने धीरे से सिर हिलाया — “हाँ… धीरे से…”

उसने धीरे-धीरे दबाना शुरू किया। पहला इंच बहुत मुश्किल से गया। मुझे तेज दर्द हो रहा था।

“आह्ह्ह… धीरे… अर्जुन…” मैं चीखी।

वो रुक गया। थोड़ी देर बाद फिर धीरे-धीरे आगे बढ़ा। धीरे-धीरे उसका पूरा मोटा लंड मेरी गांड के अंदर चला गया।

“आह्ह्ह्ह… तेरा लंड मेरी गांड फाड़ रहा है…” मैं रो रही थी, लेकिन दर्द के साथ मजा भी आ रहा था।

वो धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा। हर धक्के के साथ मेरा शरीर आगे की तरफ सरक रहा था। मेरे बूब्स हिल रहे थे। वो मेरी कमर पकड़कर जोर-जोर से धक्के मार रहा था।

“रिया… तेरी गांड कितनी टाइट है… आह्ह…” वो सिसकार रहा था।

मैं भी अब दर्द भूल चुकी थी। सिर्फ गर्माहट और भरापन महसूस हो रहा था।

“जोर से… गांड में और जोर से मार…” मैंने कहा।

उसने और तेज होकर मेरी गांड मारी। कुछ देर बाद उसने जोरदार धक्का मारा और रुक गया। मैंने महसूस किया कि उसका गरम-गरम पानी मेरी गांड के अंदर फैल रहा है।

वो मेरे ऊपर गिर गया। हम दोनों पसीने से तर हो चुके थे।

कुछ देर बाद उसने सिर उठाया और मेरे होंठों पर किस किया।

“रिया… परीक्षा तो खत्म हो गई… लेकिन ये रात अभी खत्म नहीं हुई है ना?”

मैंने मुस्कुराते हुए उसे अपनी बाहों में खींच लिया।

“नहीं… अभी तो बस शुरुआत हुई है…”