उफ्फ… दीया! कॉलेज की ओपन माइंडेड फ्रेंड के साथ पहली रोमांटिक रात

“हम जस्ट फ्रेंड्स हैं” कहने वाली दीया, जब मोहन के साथ गार्डन के कोने में बैठी और उसने सिर गोद में रखा… तो क्या हुआ? ओयो रूम में निपल्स चूसते, नाभि चाटते और चूत चूसते हुए दीया की जो सिसकारियाँ निकलीं, वो सुननी ही पड़ेंगी। पूरी कहानी सुनकर आप भी कहेंगे – और चाहिए!

SEX STORIES IN HINDI

Mohan

7/7/2026

मेरा नाम मोहन है। उम्र बीस साल। मैं बिहार का रहने वाला हूँ और बी.सी.ए. के पहले वर्ष में कॉलेज जा रहा हूँ। दिखने में औसत, लेकिन बातें करने का अंदाज़ ऐसा कि लड़कियाँ आसानी से खुल जाती हैं।

कॉलेज की कंप्यूटर प्रैक्टिकल लैब में दीया हमेशा मेरी बगल वाली सीट पर बैठती थी। गोरी रंगत, लंबे काले बाल, बड़ी-बड़ी आँखें और होंठ इतने मुलायम कि देखते ही मन करे चूम लूँ। वह खुली विचारों वाली लड़की थी। हम दोनों घंटों बातें करते, सिगरेट भी साथ पीते। धीरे-धीरे हमारी दोस्ती इतनी गहरी हो गई कि हम नंगी-नंगी बातें भी करने लगे।

एक दिन दीया ने बताया, “मोहन, मेरा बॉडी काउंट 12 है।” मैंने हँसते हुए कहा, “अरे वाह… फिर मेरा नंबर भी लगवा दो ना।” वह शर्मा गई और बोली, “अरे हम तो जस्ट फ्रेंड्स हैं।”

मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और धीरे से उसकी हथेली सहलाते हुए कहा, “फ्रेंड्स विद बेनिफिट्स भी चल सकता है क्या?” वह और शर्मा गई, लेकिन उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी।

कुछ दिनों बाद एक शाम मैंने कहा, “चलो आज गार्डन में घूमते हैं।” दीया मान गई। मैं बाइक पर बैठा था। वह मेरे पीछे बैठी और मेरी कमर से कसकर चिपक गई। उसकी नरम, भारी छातियाँ मेरी पीठ से रगड़ रही थीं। हर मोड़ पर वह और जोर से दब जाती। मैंने एक हाथ पीछे बढ़ाकर उसकी जांघ पर रख दिया और धीरे-धीरे ऊपर की ओर सहलाने लगा।

दीया की गर्म साँस मेरे कान पर पड़ रही थी। अचानक उसने अपना हाथ आगे बढ़ाकर मेरे पैंट के ऊपर से मेरे लंड को पकड़ लिया और धीरे-धीरे मसलने लगी। “उफ्फ… मोहन…” वह सिसकारी ले रही थी। मेरा लंड पैंट में ही खड़ा हो गया था।

गार्डन पहुँचकर हम एक शांत कोने में बैठ गए। मैंने अपना सिर उसकी गोद में रख दिया। वह प्यार से मेरे बाल सहला रही थी। मैंने ऊपर देखते हुए कहा, “दीया… आज मेरा बहुत मन कर रहा है तेरी कोमल चूत में अपना मोटा लंड घुसाने का। तू भी कुछ महसूस कर रही है ना?”

उसने मेरी आँखों में गहराई से देखा। फिर धीरे से झुककर मेरे होंठों पर एक लंबा, नरम किस किया। उसकी जीभ मेरी जीभ से लिपट गई। “मोहन… मेरा भी मूड बन चुका है…” उसने फुसफुसाया।

हम दोनों के शरीर में आग लग गई। मैंने उसे अपनी बाहों में कस लिया और जोश से किस करने लगा। वह भी उत्साह से जवाब दे रही थी। मैंने उसके टी-शर्ट के अंदर हाथ डाला और ब्रा के ऊपर से उसके स्तनों को दबाया। वह “आह्ह… उफ्फ…” की सिसकारियाँ ले रही थी।

“चलो, पास ही ओयो है… वहाँ आराम से…” मैंने कहा। वह शर्मा कर भी हाँ कर गई।

जैसे ही कमरे का दरवाजा बंद हुआ, मैंने दीया को दीवार से लगा लिया और गहरे, लंबे किस करने लगा। उसने मेरी शर्ट के बटन खोल दिए। मैंने उसकी टी-शर्ट और ब्रा उतार दी। उसके सुंदर, गोल स्तन सामने थे – गुलाबी निपल्स कड़े हो चुके थे।

मैंने एक निपल मुंह में लिया और चूसने लगा। जीभ से घुमाता, हल्का सा दाँतों से काटता। दीया का शरीर काँप उठा। “उम्मम… मोहन… चूसो… मेरे स्तनों को चूस लो… आह्ह…” वह मेरे सिर को अपनी छाती से दबा रही थी।

मैंने उसे बेड पर लिटा दिया। अब मैंने उसके पूरे शरीर को ऊपर से नीचे तक किसों से नहला दिया – गर्दन, कंधे, नाभि… नाभि में जीभ डालकर घुमाई तो वह पागल हो गई। “उफ्फ… मोहन… नाभि मत छेड़ो… मैं गीली हो रही हूँ…”

फिर मैंने उसकी जींस और पैंटी उतार दी। उसकी चूत पूरी तरह गीली और चमक रही थी। मैंने उसके पैर फैलाए और पहले हल्के से किस किया, फिर जीभ से चाटना शुरू किया। क्लिटोरिस पर सक्शन लिया, जीभ अंदर डाली और धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा।

दीया की सिसकारियाँ अब चीख में बदल रही थीं। “आह्ह… मोहन… और जोर से… मेरी चूत चूस लो… उफ्फ… जीभ और गहरी डाल… आज मैं तेरी रंडी हूँ… जो करना है कर ले… आह्ह… मैं झड़ने वाली हूँ…”

उसके शरीर में कंपन हो रहा था। जांघें मेरे सिर को कस रही थीं। मैंने दो उँगलियाँ भी डाल दीं और चूसते हुए हिलाने लगा। वह मेरे बाल खींच रही थी और कमर ऊपर उठा-उठा कर मेरी जीभ को और गहराई तक लेने की कोशिश कर रही थी।

कुछ देर बाद दीया ने मुझे खींचा। “अब मेरी बारी…” उसने मेरी पैंट उतारी। मेरा मोटा, लंबा लंड देखकर उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं। “भगवान… इतना मोटा… मैंने कभी इतना बड़ा लंड नहीं लिया…”

उसने दोनों हाथों से पकड़ा और मुंह में ले लिया। गर्म, गीला मुंह… उसकी जीभ लंड के नीचे घूम रही थी। वह जोर-जोर से चूस रही थी, कभी सिरे को चाटती, कभी गले तक लेने की कोशिश करती। “उम्मम… मोहन… तेरा लंड स्वादिष्ट है…”

मैं भी सिसकारियाँ ले रहा था। “दीया… उफ्फ… बहुत अच्छा लग रहा है…”

अब मैंने उसे फिर लिटाया और उसके ऊपर चढ़ गया। लंड को उसकी गीली चूत के मुंह पर रखा और धीरे से दबाया। सिरा अंदर चला गया। दीया चीख पड़ी, “आह्ह… मोहन… धीरे… बहुत मोटा है… दर्द हो रहा है… उफ्फ…”

मैंने रुककर उसे गहरे किस किया, उसके स्तनों को सहलाते हुए। फिर धीरे-धीरे और अंदर धकेला। आधा लंड अंदर जाने के बाद बाहर निकाला और फिर धीरे से।

धीरे-धीरे रफ्तार बढ़ाई। अब दीया भी मजे में आ गई थी। उसने अपनी टाँगें मेरी कमर में लपेट लीं और नाखून मेरी पीठ में गड़ा दिए। “हाँ… और जोर से मोहन… मेरी चूत फाड़ दो… प्यास बुझा दो… मैं आज तेरी हूँ… उफ्फ… आह्ह… और गहरे… और तेज…”

मैं जोर-जोर से धक्के दे रहा था। हर धक्के के साथ वह सिसकारियाँ ले रही थी। मैं उसके होंठों पर किस करता, गर्दन चूमता और जोर से चोदता जाता था। कमरा उसकी सिसकारियों और हमारी साँसों से गूंज रहा था।

आखिरकार मेरा पूरा शरीर काँप उठा। मैंने आखिरी जोर का धक्का मारा और अंदर ही झड़ गया। मेरा गर्म, गाढ़ा वीर्य उसकी चूत में भर गया। कुछ बाहर निकलकर उसकी जांघों पर बह रहा था।

हम दोनों थककर एक-दूसरे पर लेट गए। मैंने उसे अपनी बाहों में कस लिया। वह भी मुझे कसकर पकड़े हुए थी। हम नंगे, पसीने से तर, एक-दूसरे की बाहों में पंद्रह मिनट तक पड़े रहे। मैं उसके बाल सहला रहा था, उसके माथे, गालों और होठों पर प्यार से किस कर रहा था।

“दीया… तू बहुत खास है मेरे लिए…” मैंने कहा।

वह मुस्कुराई और बोली, “मोहन… आज से तू मेरा स्पेशल फ्रेंड है। जब मन करे, मिलेंगे… और ऐसे ही प्यार करेंगे।”

उसके बाद हमने कपड़े पहने और चेकआउट किया।

अब दीया मेरी फ्रेंड्स विद बेनिफिट्स बन गई है। महीने में तीन-चार बार हम मिलते हैं। हर बार लंबा रोमांटिक फोरप्ले, गहरे किस, सिसकारियाँ और जोश भरा सेक्स। दोनों को बहुत आनंद आता है।