जब बारिश ने भाभी को देवर के करीब ला दिया

प्रिया भाभी २८ साल की हैं। पति बाहर, घर में सिर्फ वो और देवर राज। बारिश की रात राज भीगकर लौटता है। प्रिया का पतला नाइट सूट, उसकी गीली शर्ट… और दोनों के बीच बढ़ती हुई बेचैनी। राज प्रिया का हाथ पकड़ता है। पहले हल्का किस, फिर उनके स्तनों पर हाथ। फिर राज घुटनों के बल बैठ जाता है और प्रिया की टाँगें फैला देता है। उनकी जीभ प्रिया को अंदर तक छूती है। प्रिया खुद राज के ऊपर सवार हो जाती है और दोनों एक-दूसरे के शरीर में डूब जाते हैं। जब राज प्रिया के सबसे गहरे हिस्से में अपना सब कुछ छोड़ देता है, तो प्रिया को एहसास होता है — यह रात अकेली नहीं रहेगी। सुनिए पूरी गर्म और रोमांचक कहानी।

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Priya

7/11/2026

मैं प्रिया हूँ। २८ साल की। शादी को चार साल हो चुके हैं। मेरा पति अक्सर बाहर रहता है। पिछले तीन दिन से घर में सिर्फ मैं और मेरा देवर राज रह रहे हैं। राज २२ साल का है। पहले तो वो सिर्फ भैया का छोटा भाई लगता था… लेकिन अब कुछ बदल रहा है।

बारिश हो रही थी। बाहर ठंडी हवा और पानी की फुहारें। अंदर मेरे शरीर में एक अजीब सी बेचैनी थी। भैया के जाने के बाद से ही मेरी रातें बेचैन गुजर रही थीं। आज शाम को नहाते वक्त जब मैंने अपने शरीर पर साबुन लगाया, तो मेरे स्तन पहले से ज्यादा संवेदनशील लग रहे थे। नीचे हाथ गया तो वहाँ हल्की नमी पहले से ही थी। मैंने सिर्फ उँगली से छुआ… और साँस अंदर खींच ली।

मैंने एक हल्का सा सफेद नाइट सूट पहना। कपड़ा बहुत पतला था। मेरे स्तन का आकार हल्का सा दिख रहा था। बाल खुले छोड़ दिए। थोड़ा परफ्यूम गर्दन पर, स्तनों के बीच और कमर के नीचे भी लगा लिया।

बारिश और तेज़ हो चुकी थी। मैं सोफे पर बैठी इंतज़ार कर रही थी। राज बाहर गया था, बारिश में भीगकर लौटेगा। मन में बार-बार वही ख्याल आ रहा था — आज जब वो आएगा… तो क्या होगा?

दरवाज़े की घंटी बजी। मैंने दरवाज़ा खोला। राज बारिश में भीगा हुआ खड़ा था। उसका सफेद शर्ट शरीर से चिपक रहा था। बाल गीले थे। उसने मुझे देखा और मुस्कुराया।

“भाभी… तू अकेली है ना? बारिश में मन नहीं लग रहा था।”

मैंने उसे अंदर आने दिया। हम सोफे पर बैठ गए। बारिश की आवाज़ के अलावा कमरे में सिर्फ हमारी साँसें थीं।

“भैया कब आएंगे?” उसने पूछा।

“दो दिन और…” मैंने कहा।

वो चुप हो गया। हम बस एक-दूसरे को देख रहे थे। उसकी गीली शर्ट के नीचे उसका शरीर… मुझे अजीब सा महसूस हो रहा था। जैसे पहली बार उसे किसी और नज़र से देख रही हूँ।

राज ने धीरे से मेरा हाथ पकड़ लिया। “भाभी… तू आज बहुत सुंदर लग रही है।”

मेरा दिल ज़ोर से धड़का। मैंने कुछ नहीं कहा। बस उसके हाथ को थामे रखा।

उसने मुझे अपनी तरफ़ खींचा। हमारी आँखें मिलीं। फिर उसने धीरे से मेरे होंठों पर अपना मुंह रख दिया।

पहला किस बहुत हल्का था। जैसे पूछ रहा हो — “ठीक है ना?” मैंने अपनी आँखें बंद करके जवाब दिया। उसने मेरे होंठों को और गहराई से चूमा। उसकी जीभ हल्की सी बाहर आई। मैंने भी अपनी जीभ उससे मिला दी। हमारी जीभें धीरे-धीरे एक-दूसरे को छूने लगीं।

उसके हाथ मेरी कमर पर आ गए। धीरे से ऊपर बढ़े। मेरे स्तन के नीचे रुक गए। मैंने साँस अंदर खींच ली। उसने हथेली से मेरे स्तन को हल्का सा दबाया — कपड़े के ऊपर से।

“आह…” मेरे मुँह से खुद-ब-खुद निकल गया।

वो मेरे स्तन को धीरे-धीरे मसलने लगा। निप्पल उसके अँगूठे के नीचे आ गया। उसने हल्का सा दबाया। मेरे पूरे शरीर में झुरझुरी दौड़ गई।

“प्रिया भाभी… तेरे स्तन इतने नरम हैं…” उसने फुसफुसाया।

मैं शरमा गई, लेकिन और भी गर्म हो गई।

उसने मेरे नाइट सूट के बटन खोलने शुरू किए। एक-एक करके। हर बटन खुलते ही उसने मेरी त्वचा पर किस किया — पेट पर, नाभि के पास, फिर ऊपर स्तनों की तरफ़।

जब आखिरी बटन भी खुल गया तो मेरे स्तन बाहर आ गए। ठंडी हवा लगते ही निप्पल और कड़े हो गए। राज ने दोनों हाथों से मेरे स्तनों को पकड़ा और धीरे से दबाया। फिर उसने सिर झुकाया और एक निप्पल को अपने होंठों में ले लिया।

पहले तो सिर्फ़ चूमना… फिर हल्का सा चूसना। जीभ से घुमाना। मैंने अपना सिर पीछे झुकाया। मेरे मुँह से लगातार हल्की-हल्की सिसकारियाँ निकल रही थीं।

“आह्ह… राज… धीरे… बहुत अच्छा लग रहा है…”

वो दूसरे स्तन पर भी वही प्यार से करने लगा। कभी चूसता, कभी हल्का सा दाँतों से छूता, कभी जीभ से सहलाता। मेरे स्तनों से नीचे तक गर्माहट फैल रही थी। मेरी जाँघें आपस में सट गईं।

उसने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया। मेरे नाइट सूट को पूरी तरह उतार दिया। अब मैं उसके सामने पूरी तरह नंगी थी। उसने मुझे देखा… जैसे कोई सपना देख रहा हो।

उसने मेरी टाँगें धीरे से फैलाईं। फिर अपने सिर को मेरी जाँघों के बीच ले आया। पहले तो सिर्फ़ गर्म साँसें… मेरी नरम, भीगी हुई जगह पर पड़ रही थीं। मैं काँप रही थी।

फिर उसने अपनी जीभ से हल्का सा स्पर्श किया। मैंने कमर ऊपर उठा दी।

“आह्ह्ह…”

वो धीरे-धीरे जीभ घुमा रहा था। ऊपर, नीचे, गोल-गोल। मेरी सारी संवेदनाएँ वहीं केंद्रित हो गई थीं। मैंने उसका सिर पकड़ लिया। उसके बालों में उँगलियाँ फँसा दीं।

“राज… बस मत रुको… मुझे अंदर तक महसूस हो रहा है…”

वो और गहराई तक जीभ ले गया। अब वो चूस भी रहा था। मेरी पूरी नरम जगह उसके मुँह में थी। मेरे शरीर में लहरें उठ रही थीं। एक के बाद एक।

मैं झड़ने के क़रीब पहुँच चुकी थी।

“राज… मैं… आह्ह्ह्ह…!”

मैं उसके मुँह पर ही झड़ गई। पूरा शरीर काँप रहा था।

जब मैं शांत हुई तो उसने अपना शर्ट और पैंट उतार दिया। उसका शरीर बहुत सुंदर था। मैंने हाथ बढ़ाकर उसे छुआ। उसका सबसे सख्त और सबसे गरम हिस्सा मेरी हथेली में आ गया। मैंने धीरे से उसे सहलाया।

“प्रिया भाभी…” उसकी आवाज़ काँप रही थी।

मैंने उसे बिस्तर पर लिटा दिया। फिर उसके ऊपर चढ़ गई। मेरे स्तन उसके सीने से सट गए। मैंने धीरे से अपने कूल्हे नीचे सरकाए। उसका गरम, सख्त हिस्सा मेरी भीगी हुई, फूली हुई जगह से छू गया।

मैंने आँखें बंद करके धीरे-धीरे बैठना शुरू किया।

पहला इंच… हल्का सा दर्द… लेकिन फिर धीरे-धीरे वो मेरी अंदरूनी दीवारों को छूता हुआ आगे बढ़ रहा था। हर इंच के साथ मेरी साँस रुक रही थी।

जब वो पूरा अंदर चला गया तो मैंने सिर पीछे झुकाया। आँसू निकल आए — दर्द के नहीं, इतने पूरे होने के आनंद के।

“आह्ह्ह… राज… तुम मेरे अंदर… पूरी तरह…”

मैं धीरे-धीरे ऊपर-नीचे होने लगी। हर बार जब वो अंदर जाता, मेरी नरम दीवारें उसे कस लेतीं।

उसने मेरी कमर पकड़ ली और मेरी लय में शामिल हो गया।

हमारी साँसें एक हो चुकी थीं। मेरे स्तन उसके चेहरे के सामने लटक रहे थे। वो उन्हें प्यार से चूमता रहा।

मैं और तेज़ होने लगी। मेरी कमर घूम रही थी। उसका अंदर का हिस्सा मेरी सबसे गहरी जगह को बार-बार छू रहा था।

“राज… मैं… मैं रुक नहीं पा रहा…”

“मत रुको… मुझे अपना बना लो… पूरी तरह…”

उसने मुझे पीठ के बल लिटा दिया। मेरी टाँगें उसके कंधों पर। अब वो ऊपर से धीरे-धीरे लेकिन गहरे धक्के मार रहा था। हर धक्के के साथ मेरा शरीर हिल रहा था। मेरे स्तन ऊपर-नीचे हो रहे थे।

मुझे महसूस हो रहा था कि मेरे अंदर एक बहुत बड़ी लहर आ रही है।

“राज… मैं… आह्ह्ह्ह…!”

इस बार की झड़न पहले से कहीं ज़्यादा गहरी थी। मेरा पूरा शरीर ऐंठ गया। मेरी अंदरूनी दीवारें उसे बार-बार कस रही थीं।

उसने भी आखिरी धक्का मारा और रुक गया। मैंने महसूस किया कि उसके अंदर से गर्म-गर्म तरल मेरी सबसे गहरी जगह में फैल रहा है। हर एक बूँद को मैं महसूस कर रही थी।

हम दोनों पसीने से तर होकर एक-दूसरे के ऊपर गिर गए।

वो मेरे स्तनों के बीच अपना सिर रखकर लेटा रहा। मैं उसके बाल सहला रही थी।

कुछ देर बाद उसने सिर उठाया और मेरे होंठों पर धीरे से किस किया।

“भाभी… भैया दो दिन और बाहर हैं ना?”

मैंने मुस्कुराते हुए उसे अपनी बाहों में खींच लिया।

“हाँ… अभी तो बस शुरुआत हुई है… और कई रातें बाकी हैं…”