AC खराब हुआ और पड़ोसी भैया ने चूत ठंडी कर दी

गर्मी की रात, पसीने से तरबतर रिया अकेले सोफे पर लेटी थी। चूत में अजीब सी खुजली हो रही थी। हिम्मत करके वो अपने पड़ोसी भैया के फ्लैट में गई। बातें शुरू हुईं, पानी पिया, फिर धीरे-धीरे भैया ने उसे छुआ... और फिर जो हुआ, उसमें रिया की मॉनिंग और चीखें पूरी रात नहीं रुकीं। सुनो वो पूरी गरम कहानी।

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Riya

7/11/2026

नमस्कार दोस्तों... मैं हूँ रिया। 23 साल की, मुंबई की एक हाईसोसायटी में अकेली रहने वाली जवान लड़की। जॉब करती हूँ, जिंदगी में सब कुछ है... सिवाय एक अच्छे, मोटे और तगड़े लंड के जो मेरी चूत को सही से संतुष्ट कर सके।

मेरे बगल वाले फ्लैट में रहते हैं राहुल भैया। उम्र करीब 34-35 साल। लंबा कद, चौड़ी छाती, मोटी बाहें और वो खास सी मर्दाना खुशबू... जो मुझे हर बार दीवाना बना देती थी। उनकी पत्नी विदेश में जॉब करती हैं और महीनों नहीं आतीं। हम दोनों में अच्छी पड़ोसी वाली दोस्ती थी। वो मेरी मदद करते, मैं कभी-कभी उनके लिए खाना बना के भेज देती। लेकिन रात को अकेले बिस्तर पर लेटकर मैं अपनी चूत सहलाते हुए कल्पना करती कि वो मुझे कैसे नंगा करके चोदेंगे... मेरी टांगें अपने कंधों पर रखकर... मेरी चूत को अपना मोटा लंड घुसाकर फाड़ देंगे।

फिर वो रात आ गई जो मेरी जिंदगी बदल गई।

गर्मी का मौसम था। एयर कंडीशन खराब हो गया था। मैं पसीने से तरबतर, सिर्फ शॉर्ट्स और एक पतली टॉप पहने सोफे पर लेटी थी। चूत में अजीब सी खुजली हो रही थी। मन कर रहा था कि कोई आकर मेरी चूत को चाटे, उंगलियाँ डाले और फिर जोर-जोर से चोदे।

मैंने हिम्मत करके राहुल भैया के फ्लैट की घंटी बजाई।

दरवाजा खुला। वो सिर्फ लूज शॉर्ट्स और एक टीशर्ट में थे। टीशर्ट की बाजू से उनकी मोटी बाहें साफ दिख रही थीं।

"अरे रिया, इतनी रात को? क्या हुआ बेटा?"

"भैया... मेरा AC खराब हो गया है। बहुत गर्मी लग रही है... और अकेले डर भी लग रहा है।"

उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, "आजा अंदर। मेरे यहाँ इन्वर्टर चल रहा है। रात भर रह ले।"

मैं अंदर गई। लाइटें थोड़ी धीमी थीं। उन्होंने मुझे ठंडा पानी दिया और सोफे पर बैठाया। बातें शुरू हुईं। पहले तो नॉर्मल बातें हुईं — गर्मी, जॉब, अकेले रहने की परेशानी। धीरे-धीरे बातें गहरी होने लगीं।

उन्होंने कहा, "कभी-कभी रात को नींद नहीं आती तो क्या करते हो?"

मैंने थोड़ा शरमा के कहा, "कुछ नहीं... बस फोन घुमाती रहती हूँ या सोचती रहती हूँ।"

उनकी नजरें मेरे चेहरे पर टिकी थीं। "तुम बहुत अकेली लगती हो रिया... लेकिन तुम्हारे जैसे खूबसूरत लड़की को अकेला रहना शोभा नहीं देता।"

मेरे शरीर में एक हल्की सी गर्माहट दौड़ गई। मैंने हँसते हुए कहा, "आप भी कम्पलीमेंट देने लगे भैया?"

"सच बोल रहा हूँ। आज तुम इन शॉर्ट्स में बहुत अट्रैक्टिव लग रही हो।"

मैं शरमा गई। चूत अब धीरे-धीरे गीली होने लगी थी। बातों में एक अलग सी इलेक्ट्रिसिटी आ गई थी।

उन्होंने धीरे से मेरा हाथ पकड़ लिया। "रिया... अगर तुम चाहो तो आज रात यहीं रह जाना।"

मैंने सिर हिलाया। "ठीक है भैया..."

उसके बाद चुप्पी छा गई। लेकिन ये चुप्पी खाली नहीं थी। उन्होंने धीरे से मेरा चेहरा अपनी तरफ घुमाया और मेरे होंठों पर हल्का सा किस किया।

मैंने रोका नहीं।

फिर दूसरा किस... थोड़ा गहरा। उनकी जीभ मेरे मुँह में घुस गई। मैं भी उन्हें जोर से चूमने लगी। उनके हाथ मेरी कमर से नीचे सरककर मेरी गांड दबाने लगे।

"रिया... तू बहुत सेक्सी है," उन्होंने फुसफुसाया।

मैंने उनकी टीशर्ट उतार दी। उनकी छाती पर हल्के बाल थे। मैंने उन्हें चूमा। उन्होंने मेरा टॉप और ब्रा उतार दिया। मेरे नंगे स्तन उनके हाथों में आ गए। उन्होंने एक निप्पल मुँह में लेकर चूसा और दूसरा हाथ से मसलने लगे।

"आह्ह्ह... भैया..." मैं सिसकारियाँ लेने लगी।

उनके हाथ मेरी शॉर्ट्स के अंदर घुस गए। मेरी पैंटी पूरी तरह भीग चुकी थी। उन्होंने दो उंगलियाँ मेरी चूत में डाल दीं और धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगे।

"देख... कितनी गीली हो गई है तेरी चूत। तू भी तो यही चाहती थी ना?" उन्होंने कहा।

"हाँ भैया... आह्ह्ह... मुझे चोद दो। आज मेरी चूत को फाड़ दो..." मैं धीरे से कराहने लगी।

उन्होंने मुझे उठाया और बेडरूम में ले गए। बेड पर लिटाया, मेरी शॉर्ट्स और पैंटी उतार दी। मेरी टांगें फैलाईं और अपना मुँह मेरी चूत पर रख दिया।

उनकी गरम जीभ मेरी चूत के होठों पर घूमने लगी। क्लिट को चूसने लगे। मैं उनकी बालों में हाथ फेर रही थी और कमर ऊपर उठा-उठा के उनके मुँह में अपनी चूत दे रही थी।

"हम्म्म... आह्ह्ह... और जोर से चाटो भैया... मेरी चूत खा लो... उम्म्म्म..." मैं जोर-जोर से मॉन करने लगी।

उनकी जीभ मेरी चूत के अंदर घुस रही थी। मैं मचल रही थी। "आह्ह्ह... भैया... और चूसो... हाँ... यहीं... उम्म्म्म... आह्ह्ह!"

मेरा पहला ऑर्गेज्म आ गया। मैं काँपते हुए उनके मुँह पर झड़ गई। मेरी चूत से पानी की तरह रस बह रहा था।

फिर उन्होंने अपना शॉर्ट्स उतारा। उनका लंड मोटा, लंबा और सख्त था। सिरा चमक रहा था। मैंने उसे दोनों हाथों में लिया और आगे बढ़कर मुँह में डाल लिया। चूसा... चाटा... गला तक अंदर लिया।

"बहुत अच्छा चूसती है तू रिया... तेरी जबान बहुत गर्म है," वो सिर पीछे झुक गए।

मैंने उनके गोटे भी चाटे।

फिर उन्होंने मुझे लिटाया। मेरी टांगें अपने कंधों पर रखीं और अपना मोटा लंड मेरी चूत के मुंह पर रखा। धीरे से दबाया।

"आह्ह्ह... धीरे भैया... मोटा है... उम्म्म्म..." मैं कराह उठी।

लेकिन वो धीरे-धीरे अंदर घुसाते गए। मेरी चूत ने उन्हें टाइट पकड़ लिया। जब पूरा लंड अंदर चला गया तो उन्होंने धीरे से चोदना शुरू किया।

हर धक्के के साथ मेरा शरीर हिल रहा था। "आह्ह्ह... भैया... और जोर से... हाँ... पेल दो मुझे... आह्ह्ह... उम्म्म!"

वो तेज हो गए। लंड मेरी चूत में अंदर-बाहर हो रहा था। "पचक-पचक" की आवाज आ रही थी। मेरी चूत से रस निकलकर उनके गोटे तक बह रहा था।

"आह्ह्ह... भैया... मेरी चूत फाड़ दी... हाँ... जोर से चोदो... आह्ह्ह... आह्ह्ह!" मैं जोर-जोर से चीख रही थी।

मैं दूसरी बार झड़ गई।

फिर उन्होंने मुझे घुमाया। डॉगी स्टाइल में कर दिया। मेरी गांड ऊपर की ओर, सिर बिस्तर में दबा। उन्होंने पीछे से लंड घुसा दिया और एक हाथ से मेरे बाल पकड़ लिए।

"ले ले रिया... मेरी रांड... तेरी चूत आज मेरे लंड की हो गई है।"

"हाँ... आह्ह्ह... मैं तेरी रांड हूँ... जोर से मारो... मेरी चूत को अपना लंड दे दो... आह्ह्ह... उम्म्म्म... हाँ... और जोर से!" मैं चिल्लाते हुए मॉन कर रही थी।

वो और तेज हो गए। मेरी गांड पर थप्पड़ मार रहे थे। हर थप्पड़ के साथ मेरी चूत और भी ज्यादा गीली होती जा रही थी।

"आह्ह्ह... भैया... मेरी गांड मत मारो... आह्ह्ह... और मारो... हाँ... आह्ह्ह!"

आखिर में उन्होंने जोर से एक धक्का मारा और अपना गरम-गरम, गाढ़ा वीर्य मेरी चूत के अंदर छोड़ दिया। मैं भी तीसरी बार जोर से झड़ गई।

"आह्हhhhh... भैया... भर दिया... पूरा भर दिया... उम्म्म्म..."

हम दोनों पसीने से तर, एक-दूसरे से सटे लेट गए।

उन्होंने मुझे गले लगाया और कान में फुसफुसाया, "ये हमारा राज रहेगा रिया।"

मैंने मुस्कुराते हुए कहा, "हाँ भैया... लेकिन जब भी मन करे, बुला लेना। मेरी चूत अब सिर्फ आपके लंड की प्यासी रहने वाली है।"

उस रात के बाद हम अक्सर मिलते हैं... कभी सोफे पर, कभी किचन में, कभी बालकनी में... हर बार नई पोजीशन, नया मजा, और मेरी मॉनिंग से भरी हुई चीखें।